नामीबिया से आ रहे चीतों का शिकार बनेंगे MP के चीतल, कुनो के जंगलों में छोड़े गए 181 चीतल

नामीबिया से आ रहें चीतों के शिकार के लिए कुनो नेशनल पार्क में चीतलों की व्यवस्था की गई है। चीतल को चीते का पसंदीदा शिकार माना जाता है। 

Updated: Sep 16, 2022, 03:27 PM IST

नामीबिया से आ रहे चीतों का शिकार बनेंगे MP के चीतल, कुनो के जंगलों में छोड़े गए 181 चीतल

मध्य प्रदेश में नामीबिया से आ रहें चीतों के स्वागत की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। नामीबिया से खाली पेट आ रहे चीतों की भूख मिटाने के लिए वन विभाग द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। चीतों के शिकार के लिए राजगढ़ जिले से 181 चीतल कुनो लाए गए हैं। वन विभाग की टीम ने उन्हें कुनो के जंगलों में छोड़ दिया है। 

दरअसल, चीतल को चीते का पसंदीदा शिकार माना जाता है। चीतों के शिकार के लिए प्रदेश के अलग-अलग छेत्रों से चीतलों का व्यवस्था की जा रही है। राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित चिड़ी खो अभयारण्य में चीतल एवं हिरणों की तादाद बहुत अधिक है। इस कारण राजगढ़ से 181 चीतल कूनो लाए गए हैं। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में उन्हें छोड़ा गया है। नामीबिया के चीते अब इन्ही चीतलों का शिकार करते हुए अपनी तादाद बढ़ा सकेंगे। 

राजगढ़ के चिड़ी खो अभयारण्य से 200 चीतलों की मांग की गई थी, इसके बदले राजगढ़ वन विभाग ने 181 चीतल श्योपुर भेजे हैं। अब छिंदवाड़ा से भी करीब 500 चीतलों को लाने की योजना है। नामीबिया से आने वाले चीतों को आसानी से भोजन सुनिश्चित करने के लिए कुनों में चीतलों का प्रजनन भी आवश्यक है। वन विभाग की कोशिश है कि कूनो वन्य अभयारण्य में कम से कम 1500 चीतल छोड़े जाएं।

राजगढ़ जिले के वन क्षेत्र में कुछ दिन पहले तक हिरन, और चीतलों की तादाद काफी ज्यादा थी। अचानक इतनी बड़ी संख्या में चीतल बाहर भेजे जाने के बाद अब पर्यटकों को चीतल देखने को नहीं मिल रही है। कूनो वन अभयारण्य के बाद चीतों का अगला पड़ाव गांधी सागर अभयारण्य रहेगा। गांधी सागर अभयारण्य के लिए राजगढ़ से 500 चीतल भेजे गए हैं। 

माना जा रहा है कि कुनो में चीतों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आएँगे। पर्यटकों के ठहराने के लिए स्थान और घुमाने वाले गाइडों की जरूरत के लिए स्थानीय प्रशासन ने 50 आदिवासियों के घरों को ग्रामीण होम स्टे बनाने का फैसला लिया है। साथ ही 30 आदिवासी महिलाओं को टूरिस्ट गाइड भी बनाया है।