हरे भरे जंगलों में ही हो आदिवासियों का विस्थापन, दिग्विजय सिंह ने की विस्थापन नीति में बदलाव की मांग

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पत्रकार नीलम तिवारी का पत्र सीएम शिवराज सिंह चौहान को प्रेषित करते हुए कहा है कि नर्मदापुरम में जंगलों की कटाई रोकी जाए और हरे भरे जंगलों में ही आदिवासियों का विस्थापन किया जाए

Updated: Jun 25, 2022, 08:12 PM IST

हरे भरे जंगलों में ही हो आदिवासियों का विस्थापन, दिग्विजय सिंह ने की विस्थापन नीति में बदलाव की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में आदिवासियों के विस्थापन के लिए हो रहे जंगलों की कटाई को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता ने इस बाबत सीएम शिवराज सिंह चौहान को पत्रकार नीलम तिवारी का आवेदन पत्र प्रेषित कर जंगलों की कटाई तत्काल रोकने की मांग की है। सिंह ने कहा है कि जंगल काटकर विस्थापन के बजाए आदिवासियों का विस्थापन हरे भरे जंगलों में ही किया जाए।

दिग्विजय सिंह ने सीएम चौहान को नर्मदापुरम जिला अंतर्गत सोहागपुर तहसील के मातापुरा निवासी पत्रकार नीलम तिवारी का आवेदन पत्र प्रेषित किया है। इस आवेदन के माध्यम से नीलम तिवारी ने दिग्विजय सिंह को बताया कि, 'मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील अंतर्गत बागरा ग्राम के पास सुपलई, मल्लूपुरा, खामदा सहित अन्य गांवों के निवासियों को सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान से विस्थापित किये जाने की योजना पर काम चल रहा है। इन ग्रामों के रहवासियों को बसाने के लिये करीब 250 हेक्टेयर जमीन पर लगे जंगल को काटा जा रहा है। 

आवेदक का कहना है कि इससे सैंकड़ों वर्ष पुराने जंगली और इमारती लकड़ी के पेड़ लगे है। इन दिनों करीब ढ़ाई सौ एकड़ भूमि पर स्थित जंगल को काटने के पश्चात वहां के आदिवासी वर्ग के लोगों को विस्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। नीलम तिवारी ने इसे पर्यावरण विरोधी निर्णय करार देते हुए कहा कि आने वाले समय में पर्यावरण असंतुलित होने तथा जिले की आमजन को प्राणवायु के लिये संघर्ष करने की परिस्थिति बनेगी। उन्होने जंगलों की कटाई के कार्य को तत्काल रोके जाने का भी निवेदन किया है। 

पत्र में राष्ट्रीय उद्यान के सहायक संचालक संदेश माहेश्वरी के हवाले से बताया गया है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित राज्य शासन ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर लगे वन को काटने की अनुमति दी है। वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिये काम कर रही पत्रकार नीलम तिवारी का कहना है कि वन विभाग बिना जंगल काटे इसी भू-भाग पर विस्थापित परिवारों की बसाहट कर सकता है। वनवासी वैसे भी वनों के बीच कहीं अधिक सुविधाजनक स्थिति में जीवन यापन कर सकते हे। 

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सीएम चौहान से अनुरोध किया है कि बागरा क्षेत्र में वर्षो पुराने जंगल काटने की अनुमति निरस्त की जाए। साथ ही इस मामले की राज्य स्तर पर पुनः परीक्षण करा नये सिरे से विस्थापन की नीति बनाई जाये। बागरा गांव पास सुपलई, मल्लूपुरा, खामदा सहित अन्य गांवों की करीब ढ़ाई सौ हेक्टेयर भूमि पर स्थित 100 साल से भी अधिक पुराने जंगल को काटने से रोके जाए और आदिवासियों को उसी हरे भरे जंगल में विस्थापित किया जाए।