इंदौर: फुल वैक्सिनेशन के बिना बैंक में नो एंट्री, लीगल एक्सपर्ट ने बताया व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला

इंदौर में वैक्सीन का दोनों डोज नहीं लेना पड़ सकता है भारी, टीकाकरण के आंकड़े बढ़ाने के लिए एंट्री बैन करने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट के वकील ने कहा- इंदौर कलेक्टर को संवैधानिक समझ की कमी है

Updated: Nov 11, 2021, 12:38 PM IST

इंदौर: फुल वैक्सिनेशन के बिना बैंक में नो एंट्री, लीगल एक्सपर्ट ने बताया व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला
Photo Courtesy: BBC

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रशासन ने टीकाकरण के आंकड़ों को बढ़ाने के लिए अजीबोगरीब निर्देश दिया है। इंदौर में 1 दिसंबर से बैंकों, अस्पतालों, मंदिरों व अन्य स्थानों पर वैक्सीन के दोनों डोज के बिना एंट्री नहीं मिलेगी। कानूनी जानकारों ने इंदौर कलेक्टर के इस पहल को असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करार दिया है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे इंदौर में सरकार जल्द से जल्द शत प्रतिशत टीकाकरण कराना चाहती है। सीएम शिवराज के निर्देशों के बाद इंदौर जिला प्रशासन ने 30 नवंबर तक शत प्रतिशत टीकाकरण का संकल्प लिया है। इसे पूरा करने के लिए प्रशासन द्वारा रोको टोको अभियान का सहारा लिया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: गुजरात दंगा: सुनवाई के दौरान SC में भावुक हुए कपिल सिब्बल, बोले- मैंने भी अपनों को खोया है

इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बुधवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के अधीक्षक और प्राइवेट अस्पतालों के संचालक और प्रतिनिधियों, सभी कमर्शियल एवं सहकारिता बैंकों के प्रतिनिधि, फूड इंस्पेक्टर और राशन दुकानों के संचालकों साथ बैठक की। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि 30 नवंबर के बाद यानी 1 दिसंबर से कोविड के दोनों डोज लिए बिना किसी को सेवाएं नहीं दी जाएगी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्टर ने निर्देश दिया है कि 1 दिसंबर के बाद बैंक में किसी भी ग्राहक को कोविड-19 के सेकंड डोज सर्टिफिकेट के बिना एंट्री ना दी जाए। इसी तरह कलेक्टर ने राशन दुकान संचालकों को भी निर्देश दिया है कि कि दुकानों पर राशन लेने आने वाले लोगों का वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट देखने के बाद ही उन्हें राशन दिया जाए। बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप, मिल्क बूथ संचालकों को भी इसी तरह के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें: 1947 में भीख मिली थी असली आज़ादी 2014 में मिली है, कंगना के बेतुके बयान पर लोगों ने किया ट्रोल

प्रशासन का कहना है कि लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, कानूनी जानकार इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एहतेशाम हाशमी ने मामले पर हम समवेत से बातचीत के दौरान कहा, 'वैक्सीनेशन पूरी तरह से स्वैच्छिक है। किसी को इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। इंदौर कलेक्टर के निर्देशों से प्रतीत होता है कि उनमें संवैधानिक समझ की कमी है।

हालांकि, इंदौर एडीएम अभय बेडेकर ने मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है। बेडेकर ने हम समवेत से बातचीत के दौरान कहा कि प्रशासन ने सिर्फ ये निर्देश दिया है कि बैंक, राशन दुकान व अन्य जगहों पर उपभोक्ताओं को वैक्सीन लेने के लिए समझाया जाए। बेडेकर के मुताबिक किसी को सेवाओं से वंचित नहीं किया जाएगा बल्कि उन्हें सिर्फ समझाइश दी जाएगी। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि प्रशासन ने लिखित नहीं लेकिन मौखिक रूप से स्पष्ट कहा है कि दोनों डोज लिए बिना किसी को एंट्री न दी जाए।