गुजरात दंगा: सुनवाई के दौरान SC में भावुक हुए कपिल सिब्बल, बोले- मैंने भी अपनों को खोया है

गुजरात दंगा मामले में नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने का मामला, कपिल सिब्बल बोले- सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा की तरह है, यह प्रतिशोध की जमीन को उपजाऊ बनाती है

Updated: Nov 10, 2021, 04:31 PM IST

गुजरात दंगा: सुनवाई के दौरान SC में भावुक हुए कपिल सिब्बल, बोले- मैंने भी अपनों को खोया है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हमेशा आक्रामक दिखने वाले दिग्गज वकील कपिल सिब्बल आज न्यायालय में भावुक हो गए। गुजरात दंगों की सुनवाई के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ बोलते हुए कपिल सिब्बल कोर्ट रूम में अपनी आंसुओं को रोक नहीं सके। सिब्बल ने सांप्रदायिक हिंसा की तुलना ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा से करते हुए कहा कि यह प्रतिशोध की जमीन को उपजाऊ बनाता है।

दरअसल, कपिल सिब्बल बुधवार को गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी की ओर से दायर याचिका पर बहस कर रहे थे। जकिरा जाफरी ने अपनी याचिका में कहा है कि 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के पीछे बड़ी साजिश थी। उन्होंने गुजरात दंगा मामले में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 63 आरोपियों को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को चुनौती दी है।

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बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ के समक्ष जकिया की ओर से प्रस्तुत हुए कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि एसआईटी ने उचित जांच किए बिना मामले को बंद कर दिया। सिब्बल के मुताबिक एसआईटी ने कई महत्वपूर्ण सबूतों को भी नजरअंदाज किया। मसलन इस पूरे मामले में SIT ने कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड की जांच नहीं की। न किसी गवाह से बात की न ही किसी के फोन की जांच की गई।

कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि गुलबर्गा सोसायटी की घटना में विस्फोटक लाने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने शीर्ष न्यायालय से पूछा कि आखिर किस आधार पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई। सिब्बल इस दौरान विभाजन के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों को याद कर भावुक हो गए और अपनी आंसूओं को रोक नहीं पाए।

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सिब्बल ने कहा, 'मेरी चिंता वास्तव में भविष्य के लिए है। सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा की तरह है, जो भविष्य में प्रतिशोध की जमीन तैयार करता है। चाहे वह किसी भी समुदाय द्वारा हो। यह संस्थागत हिंसा है। मैंने पाकिस्तान में अपने नाना- नानी को खोया है। मैं भी उसी का शिकार हूं। मैं किसी A या B पर आरोप नहीं लगाना चाहता। बस दुनियाभर में एक संदेश जाना चाहिए कि हिंसा की इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।'

सुनवाई के दौरान SIT की ओर से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने सिब्बल के दलीलों को नकारते हुए कहा कि जांच में ऐसा कुछ भी नहीं मिला था, जिसके आधार पर इसे आगे बढ़ाया जाए। इसलिए एसआईटी ने मामले को बंद कर दिया। इसपर कपिल सिब्बल ने कहा की SIT ने तहलका मैगजीन के स्टिंग टेपों को भी नजरअंदाज कर दिया, जिसमें कई लोगों ने हिंसा और हथियारों को इकट्ठा करने में अपनी भागीदारी को लेकर बयान दिया था। जबकि नरोदा पाटिया मामले में आरोपों को सिद्ध करने के लिए उन्हीं स्टिंग ऑपरेशन के टेप का इस्तेमाल किया गया था।