MP विधानसभा में उठा आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा, BJP विधायक ने नस्ल खत्म करने की मांग की
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भोपाल में 19 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। सदन में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा मौजूदा वित्तीय वर्ष का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। बजट 19 हजार 287 करोड़ 32 लाख रुपए का है। इस पर 23 फरवरी को चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही आज सदन में आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा भी उठा।
कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील और राजन मंडलोई ने नियम 138(1) के तहत भोपाल में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण नहीं किए जाने का मामला उठाया। अकील ने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ने से लोगों में आक्रोश है और निकाय इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। हालात ये हैं कि प्रशासन और नगर निगम द्वारा नसबंदी-वैक्सीनेशन के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बावजूद न तो आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण हो पा रहा है और न ही काटने की घटनाओं में कमी आ रही है। शहर में प्रतिदिन 40 से 50 आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक अकील ने आगे कहा कि कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने और एंटी-रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता न होने के कारण मौत तक हो चुकी है। हाल ही में डॉग बाइट रेबीज की गिरफ्त में आए एक युवक की हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसकी मौत का मुख्य कारण समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होना था। यह समस्या अब सिर्फ डर या असुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक विफलता का मुद्दा बन चुकी है।
इसके जवाब में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नगर निगम में डॉग स्क्वॉड टीम बनाई गई है और सूचना मिलने पर टीम तुरंत कार्रवाई करती है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में 26,900 कुत्तों का टीकाकरण किया गया है और 5,023 रेबीज के टीके उपलब्ध हैं। साथ ही उन्होंने कुत्ते के काटने से किसी की मौत होने की घटना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, भोजन की उपलब्धता, ब्रीडिंग सीजन, बीमारियां और बच्चों की सुरक्षा जैसे कारणों से आवारा कुत्तों में आक्रामकता बढ़ जाती है, जिससे डॉग बाइट की घटनाएं होती हैं।
विजयवर्गीय ने आगे कहा कि नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है। शहर में वैक्सीन की कमी नहीं है। साल 2023 में श्वान नसबंदी केंद्रों की संख्या 1 से बढ़ाकर 3 की गई। नसबंदी कार्य ऑनलाइन टेंडर के जरिए चयनित, भारत सरकार की एनिमल वेलफेयर बोर्ड से मान्यता प्राप्त एनजीओ द्वारा पशु चिकित्सकों की निगरानी में कराया जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र. के अनुसार भोपाल शहर में एंटी-रेबीज वैक्सीन के 5,023 इंजेक्शन उपलब्ध हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि शहर में वैक्सीन की उपलब्धता नहीं है।
विधायक आतिफ अकील ने मंत्री द्वारा दिए गए जवाब पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री गलत जवाब दे रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि कैलाश जी कुत्तों के मंत्री हैं और कुत्तों के प्रभारी मंत्री सुन नहीं रहे हैं। वहीं भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि उन्होंने पहली बार सुना है कि कुत्ते आतंकवादी होते हैं।प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा और भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने भी एंटी-रेबीज इंजेक्शन की कमी का मामला उठाया और कहा कि इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस दौरान भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि देश में 80 करोड़ लोगों को सरकार राशन और अन्य सुविधाएं दे रही है, जबकि लोग श्वानों पर एक-एक लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं। जब हम लोगों को ही पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तो इनकी नस्ल को खत्म किया जाना चाहिए और इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले में गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का ध्यान रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।




