पीएम आवास की आस में ठगे गए लोग, महिला ने 20 से ज़्यादा लोगों को दिया झाँसा

जबलपुर में एक महिला की ठगी के शिकार बने लोगों में ज़्यादातर बुजुर्ग, पीएम आवास के नाम पर दस्तावेज़ लेकर फ़ाइनेंस कराए वाहन

Updated: Feb 04, 2021, 03:27 PM IST

पीएम आवास की आस में ठगे गए लोग, महिला ने 20 से ज़्यादा लोगों को दिया झाँसा
Photo Courtesy : Dainik Bhaskar

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने पीएम आवास योजना के तहत घर दिलाने का लालच देकर बीस से ज़्यादा लोगों को ठग लिया। धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों में ज़्यादातर सत्तर साल से ऊपर के बुजुर्ग हैं। अपना नाम काजल शर्मा बताने वाली एक महिला ने उन्हें घर दिलाने का वादा करके फ़ॉर्म भरवाए, लेकिन फिर उन्हें बैंक का क़र्ज़दार बनाकर लापता हो गई। इन लोगों को अपने ठगे जाने की जानकारी तब मिली जब बैंक के लोग लोन की किस्त वसूलने के लिए उनके घर पहुँचे। 

ठगी के शिकार हुए लोगों के मुताबिक इंडियन ओवरसीज बैंक के कुछ कर्मचारी बुधवार को उनके घर आए और गाड़ी ख़रीदने के लिए लिए गए क़र्ज़ की किस्त चुकाने को कहा। इस पर ये सभी लोग हैरान रह गए। लोगों ने बताया कि उन्होंने तो कोई क़र्ज़ नहीं लिया और न ही गाड़ी ख़रीदी है। पीड़ितों का कहना है कि जब हमारे पास दो वक़्त की रोटी का इंतज़ाम नहीं है तो गाड़ी क्यों ख़रीदेंगे। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने बताया कि उनके नाम पर बैंक से वाहन लोन ले लिए हैं। लोन के लिए दस्तावेज भी उन्हीं के लगे हैं।

पीड़ितों के मुताबिक़ काजल शर्मा नाम की यह महिला कुछ महीने पहले उनके पास आई और सभी को पीएम आवास दिलाने का वादा किया। इसके लिए सभी से एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरवाए। साथ ही उनके आधार कॉर्ड, परिचय पत्र, बैंक के दस्तावेज भी जमा कराए। पीड़ितों के मुताबिक़ उसने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही सभी को पीएम आवास मिल जाएगा। उसने सत्तर साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के नाम ये कहते हुए भरवाए थे कि बुजर्गों को पीएम आवास प्राथमिकता के आधार पर मिलेंगे। पीड़ितों के मुताबिक़ महिला ने उनसे एप्लीकेशन के साथ ही साथ दो-दो हज़ार रुपये भी लिए। उसके बाद लोग घर मिलने का इंतज़ार करते रह गए और महिला ठग उन्हें क़र्ज़दार बनाकर रफ़ूचक्कर हो गई।

सारा मामला पता चलने के बाद सभी पीड़ितों ने घमापुर थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस उनकी शिकायत के आधार पर काजल शर्मा की तलाश में हनुमान टोरिया पहुंची, लेकिन वहाँ उसका कहीं अता-पता नहीं था। उसका मोबाइल नंबर भी बंद आ रहा है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।

इस मामले में सवाल यह भी है कि महिला ने जिस तरह लोगों को झाँसा देकर लोन पास कराया, क्या उसमें बैंक कर्मचारियों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? क्या बैंक में कोई भी शख़्स बीस से ज़्यादा लोगों के दस्तावेज जमा करके उनके नाम पर लोन ले सकता है? लोन देने से पहले बैंक के कर्मचारियों ने अगर ठीक से जाँच की होती, जिनके दस्तावेज़ों पर लोन पास हुए उनसे बात की होती तो ठगी की ऐसी वारदात को रोका जा सकता था।