MP: दो बच्चों के कानून की पैरवी करने वाली BJP के करीब 40 फीसदी विधायकों के हैं 3 से 9 बच्चे

जनसंख्या कानून पर बवाल, मध्यप्रदेश बीजेपी कर रही है दो बच्चों के कानून की पैरवी, यदि विधायकों पर हुआ लागू तो 49 विधायक हो जाएंगे अयोग्य, शिवराज कैबिनेट में 13 मंत्रियों के 3 से अधिक बच्चे/विधायक राम लल्लू वैश्य इस सूची में 9 बच्चों के साथ टॉप पर 

Updated: Jul 17, 2021, 05:09 PM IST

MP: दो बच्चों के कानून की पैरवी करने वाली BJP के करीब 40 फीसदी विधायकों के हैं 3 से 9 बच्चे
Photo Courtesy : Outlook

भोपाल। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण विधेयक 2021 ड्राफ्ट तैयार करने के बाद अब मध्यप्रदेश में भी इस तरह का कानून लाने की बात होने लगी है। बीजेपी के मंत्री व विधायक जोर-शोर से दो बच्चों के कानून की पैरवी करने में जुट गए हैं। हालांकि, स्थिति ये है कि दूसरों को नसीहत देने वाली बीजेपी के खुद करीब 40 फीसदी विधायक ऐसे हैं जिनके 3 से लेकर 9 बच्चे हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक बीजेपी के करीब 125 विधायकों में से 49 विधायक ऐसे हैं जिनके 3 से लेकर 9 बच्चे हैं। इतना ही नहीं शिवराज कैबिनेट में 13 मंत्रियों के 3 से लेकर 6 बच्चे हैं। बीजेपी के एक विधायक के 9 बच्चे हैं, एक के आठ बच्चे हैं, तो वहीं चार विद्यायकों के 6-6 बच्चे हैं। इतना ही नहीं 14 विधायक ऐसे हैं जिनके 4 से ज्यादा बच्चे हैं। सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक राम लल्लू वैश्य इस सूची में 9 बच्चों के साथ टॉप पर हैं। जबकि सीधी से उनके साथी विधायक केदारनाथ शुक्ल 8 बच्चों के साथ दूसरे स्थान पर जगह बनाए हुए हैं। 

41 फीसदी मंत्रियों के 3 से ज्यादा बच्चे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शिवराज सरकार में 31 कैबिनेट मंत्री हैं। इनमें से 13 मंत्रियों के तीन से अधिक बच्चे हैं। इनमें तीन मंत्रियों भूपेंद्र सिंह, प्रेम सिंह पटेल और बिसहुलाल के पांच या उससे अधिक बच्चे हैं। ऐसे में यदि मध्यप्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होता है और यह नियम यदि विधानसभा चुनाव में भी लागू कर दिया जाए तो बीजेपी के 40 फीसदी मंत्री विधायक अयोग्य हो जाएंगे। 

सांसदों की बात की जाए तो प्रदेश में बीजेपी के 28 लोकसभा सांसद हैं, वहीं 10 राज्यसभा सांसद हैं। यानी दोनों सदनों को मिलाकर कुल 38 सांसद हैं। इनमें से 6 सांसद केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। लोकसभा और राज्यसभा की वेबसाइटों पर अपलोड किए गए आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 12 सांसदों के 3 से अधिक बच्चे हैं। इनमें चार सांसदों के 4 से अधिक बच्चे हैं। केंद्रीय मंत्रियों में चार-चार बच्चों वालों की सूची में नवनियुक्त सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हैं। 

दरअसल, मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री व सीएम के सबसे करीबी माने जाने वाले विश्वास सारंग ने बयान जारी कर कहा था कि मध्यप्रदेश में भी यूपी के तर्ज पर कानून बनाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं बीजेपी के बड़बोले विधायक व प्रोटेम स्पीकर रह चुके रामेश्वर शर्मा ने तो सीएम शिवराज को इस बाबत चिट्ठी लिख डाली थी। शर्मा ने सीएम से मांग किया था कि तत्काल मध्यप्रदेश में भी इस तरह का मसौदा तैयार किया जाए। शर्मा का तर्क था कि प्रदेश की जनसंख्या जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन, इटली और स्पेन जैसे विकसित देशों की जनसंख्या को पार कर गई है इसी कारण राज्य का विकास नहीं हो पा रहा है। 

कांग्रेस विधायकों की क्या है स्थिति

मध्यप्रदेश के अन्य दलों की बात करें तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के 95 विधायक हैं। इनमें से 16 के तीन बच्चे, 12 के चार, तीन के पांच और एक के नौ बच्चे हैं। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश में सन 2000 में ही जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया गया था जिसमें कानून लागू होने के बाद दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को किसी भी तरह का सरकारी सेवाओं का लाभ न देने और पंचायत चुनाव लड़ने से बैन करने का निर्णय लिया गया था। 

मप्र सरकार के सामान्य प्रशासनिक विभाग द्वारा 10 मार्च, 2000 को जारी आदेश के अनुसार 'कोई भी व्यक्ति किसी सेवा या पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा जिसके दो से अधिक जीवित बच्चे हैं यदि उनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ है। हालांकि, बीजेपी सरकार आने के बाद ही 2005 में ही पंचायत चुनाव को इस कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया। लेकिन अब यही बीजेपी एक बार फिर से इस कानून का ड्राफ्ट बनाने की बात कर रही है। ऐसे में यह मांग उठना लाजमी है कि इसे विधानसभा चुनाव में भी लागू किया जाए। यदि ऐसे होता है तो बीजेपी के 49 विद्यायकों की पात्रता खत्म हो जाएगी।