नर्मदा के पथिक: दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा पर आधारित पुस्तक का विमोचन, जुटेंगे राजनीति के कई दिग्गज

परिक्रमा पूरी होने के चार साल बाद आया यात्रा वृतांत, ‘नर्मदा के पथिक’ में दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता राय के अनुभवों का होगा लेखा जोखा, नर्मदा किनारे बसे लोगों के सांस्कृतिक परिवेश को पहचानने का मिलेगा मौका

Updated: Sep 27, 2021, 07:22 PM IST

नर्मदा के पथिक: दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा पर आधारित पुस्तक का विमोचन, जुटेंगे राजनीति के कई दिग्गज

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता राय की नर्मदा यात्रा के खत्म होने के चार साल बाद उसपर लिखी गई पुस्तक आई है। पुस्तक का विमोचन आगामी 30 सितंबर को राजधानी भोपाल स्थित विधानसभा सभागार में होने वाला है। नर्मदा के पथिक नाम से इस पुस्तक में दिग्विजय सिंह, उनकी पत्नी अमृता राय और उनके सहयात्रियों के अनुभवों का लेखा जोखा होगा।

पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है। वैसे तो यह पुस्तक पूरी तरह से गैर राजनीतिक है, लेकिन विमोचन में सभी राजनीतिक दलों के लोग शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि 'नर्मदा के पथिक' पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, सीएम शिवराज, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व प्रह्लाद पटेल, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व सीएम उमा भारती समेत कई बीजेपी विधायक, मंत्री व सांसदों को आमंत्रण दिया गया है। 

कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के भी कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। वहीं नर्मदा परिक्रमा पूरा करने वाले दिग्विजय सिंह व सभी सहयात्री भी मौजूद रहेंगे। विमोचन कार्यक्रम में बुद्धिजीवीयों व पत्रकारों को भी विशेष रूप से बुलावा भेजा गया है। बता दें कि दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से साल 2017 में 30 सितंबर को नर्मदा पूजन के बाद यह नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा शुरू की थी। तकरीबन 3 हजार 300 किलोमीटर के इस दुर्गम रास्तों में पैदल यात्रा को पूरा करने में करीब 192 दिन लगे थे। पुस्तक के लेखक दिग्विजय सिंह के निजी सचिव ओपी शर्मा हैं और शिवना प्रकाशन इसे प्रकाशित कर रही है।

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जानकारी के मुताबिक इस पुस्तक में मां नर्मदा की महिमा से लेकर बदहाली तक का वर्णन किया गया है साथ ही नर्मदा किनारे रहने वाले लोगों की पीड़ा भी बताई गई है। पुस्तक की प्रस्तावना में दिग्विजय सिंह ने लिखी है, जो कहती है, 'यह सिर्फ एक यात्रा वृत्तांत ही नहीं बल्कि एक ऐसा साक्षी दस्तावेज़ भी है जिसमें नर्मदा के तट पर बसने वाले लोगों के जीवन, धर्म, सामाजिक रीति-रिवाज, परंपराएँ, मान्यताएँ, उत्सवों और त्योहारों से जुड़े सभी पहलुओं का अद्भुत समावेश किया गया है।' 

जानेमाने लेखक व शिवना प्रकाशन के संस्थापक पंकज सुबीर इस पुस्तक को लेकर कहते हैं कि यह एक अलग तरह की किताब है। क्योंकि नर्मदा के किनारे की जो भौगोलिक स्थिति है और जो सामाजिक परिवेश है वो पहली बार किसी किताब के रूप में सामने आ रहा है। सुबीर ने कहा कि नर्मदा को लेकर पहले भी कई पुस्तकें आई लेकिन यह एकमात्र ऐसी पुस्तक है जिसमें एमपी, महाराष्ट्र और गुजरात की जीवनदायनी मानी जाने वाली मां नर्मदा के किनारे रह रहे लोगों की सभ्यता को पहचानने का प्रयास किया गया।

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पंकज सुबीर के मुताबिक इस पुस्तक में नर्मदा के किनारे की संस्कृति, बोली, भाषा, खान पान, रीति रिवाज, त्योहार इन सारी चीजों को समाहित किया गया है। इसे पढ़ने के बाद नर्मदा परिक्रमा करने की इच्छा जागृत होती है। सुबीर ने बताया कि पिछले कई हफ्तों से यह किताब अमेजन स्टोर के टॉप 100 में है, जबकि अभी सिर्फ प्री बुकिंग ही खोली गई है, डिलीवरी शुरू नहीं हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि न सिर्फ नर्मदा में आस्था रखने वाले लोग बल्कि युवा पाठकों को भी यह पुस्तक खासा आकर्षित और प्रभावित करेगी।

पुस्तक के लेखक ओपी शर्मा कहते हैं, ‘यह पुस्तक पूर्णतः नर्मदा की संस्कृति, नर्मदा की सभ्यता, नर्मदा के किनारे रहने वाले लोग, उनकी बोली, भाषा, उनकी जरूरतें, समाज से उनकी अपेक्षाएं, जंगल, रेत, जमीन के बारे में लिखी गई है। मुझे उम्मीद है कि मां नर्मदा में आस्था रखने वाले हजारों लोग इसे पढ़ेंगे और पाठकों को यह पसंद आएगी।’