RSS के मुखपत्र ने अमेज़न को बताया ईस्ट इंडिया कंपनी, भारतीय बाज़ार पर एकाधिकार का लगाया आरोप

RSS के मुखपत्र पांचजन्य ने अमेज़न पर अपनी कवर स्टोरी में आरोप लगाया कि ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने जिस प्रकार भारत पर कब्ज़ा करने के लिए हथकंडे अपनाए, उन्हीं हथकंडों की झलक अमेज़न के तौर तरीकों में दिख रही है। जवाब में अमेज़न ने कहा कोरोना काल में 3 लाख से ज्यादा छोटे कारोबारियों को दिया फायदा

Updated: Sep 27, 2021, 04:42 PM IST

RSS के मुखपत्र ने अमेज़न को बताया ईस्ट इंडिया कंपनी, भारतीय बाज़ार पर एकाधिकार का लगाया आरोप

नई दिल्ली। हिंदू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ने ई कॉमर्स कंपनी अमेज़न के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पांचजन्य ने अमेज़न पर भारतीय बाज़ार पर एकाधिकार जमाने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया है। पत्रिका ने कंपनी पर आरोपों की बौछार लगाते हुए उसे ईस्ट इंडिया कंपनी 2 यानी ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा अवतार करार दिया है। जवाब में अमेजन ने एक दिन का समय लिया और कहा है कि यह आरोप सही नहीं है क्योंकि कोरोना से जूझते देश में लॉक़ाउन के दौरान देश के 450 से ज्यादा शहरों से तीन लाख विक्रेताओं ने उसकी ऑनलाइन साइट को ज्वाइन किया। 

पांचजन्य पत्रिका का आरोप है कि जिस तरह के हथकंडे अंग्रेज़ों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनाए, अमेज़न के तौर तरीके भी ठीक वैसे ही हैं। पांचजन्य ने अपने वर्तमान अंक में अमेज़न पर एक कवर स्टोरी की है। अमेज़न पर की गयी पांचजन्य की इस कवर स्टोरी में भारत की आर्थिक आज़ादी पर अमेजन के खतरे के बार में लिखा गया है। स्टोरी के मुताबिक इससे स्थानीय लघु और मध्यम उद्योगों को भारी नुकसान की आशंका है।

अमेज़न पर लगाए यह आरोप 
आरएसएस के मुखपत्र ने कहा है कि अमेज़न ने भारतीय बाज़ार पर एकाधिकार जमाने के लिए छोटी कंपनियां बनायीं और फिर कंपनी ने भारत में नीतियों को अपने पलड़े में झुकाने के लिए कानूनी फीस के तौर पर करोड़ों की रिश्वत दी। पांचजन्य का आरोप है कि यह सब भारतीय बाज़ार पर अपना वर्चस्व स्थापित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।  

मुखपत्र का कहना है कि अमेज़न अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारतीय लोगों की राजनीतिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्वंतत्रता को सीमित करने की शुरुआत कर चुकी है। साथ ही साथ मुखपत्र ने ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि इस प्लेटफॉर्म पर भारतीय संस्कृति को कमतर और नीचा दिखाने के लिए फिल्मों और टीवी सीरिज़ को रिलीज़ किया जाता है।  

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पांचजन्य पिछले महीने भी तब सुर्खियों में रहा जब उसने इंफोसिस पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। पांचजन्य ने अपनी कवर स्टोरी में इंफोसिस को टुकड़े-टुकड़े गैंग, नक्सलियों का समर्थक करार दिया था। लेकिन जब पांचजन्य की इस स्टोरी पर बवाल मचा तब खुद आरएसएस ने अपने ही मुखपत्र से किनारा कर लिया। आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनिल आंबेकर ने पांचजन्य में प्रकाशित लेख से कन्नी काटते हुए कहा था कि इंफोसिस का इस देश के योगदान में अहम योगदान है, लिहाज़ा यह आरोप सही नहीं है। इतना ही नहीं संघ के प्रचार प्रमुख ने इतना तक कह डाला था कि पांचजन्य संघ का मुखपत्र नहीं है।  

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कांग्रेस भी उठा चुकी है अमेज़न पर सवाल 
भले ही आरएसएस के मुखपत्र ने अमेज़न की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे भारतीयता पर आए खतरे से जोड़ा हो, लेकिन इस मामले में कांग्रेस पार्टी सवाल खड़ा कर चुकी है। अमेज़न पर आरोप है कि उसकी कुल 6 अलग-अलग इकाईयों ने 2018 से लेकर 2020 तक कुल 8,546 करोड़ रुपए कानूनी फीस के नाम पर खर्च किए, लेकिन यह राशि रिश्वत के तौर पर दी गई। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले में हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी, जिसमें उन्होंने यह सवाल भी खड़ा किया था कि आखिर यह रिश्वत भारत में पदस्थ कौन से अधिकारियों को दी गई? साथ ही कौन-कौन से राजनेता इस पूरी मिलिभगत में शामिल थे? कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच करने की मांग की थी।