सफाईकर्मिओं के हड़ताल से चरमराई MP की सफाई व्यवस्था, मांगें पूरी न होने पर जलापूर्ति रोकने की चेतावनी

मध्यप्रदेश में दिवाली से ठीक पहले सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। भोपाल समेत कई शहरों में निकाय कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कचरा उठना बंद होने से चारों तरफ गंदगी फैल गई है।

Updated: Nov 05, 2026, 03:27 PM IST

भोपाल। दीपावली से ठीक पहले मध्य प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। नियमितीकरण, वेतन बढ़ाने और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर हजारों नगरीय निकाय कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राजधानी भोपाल में गुरुवार को हड़ताल का लगातार दूसरा दिन रहा। घरों से कचरा उठना बंद होने के कारण सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में गंदगी जमा होने लगी है। इस बीच कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो शुक्रवार से शहर की जलापूर्ति भी रोक दी जाएगी। इससे त्योहार के दौरान पेयजल संकट खड़ा होने की आशंका है।

भोपाल में इस आंदोलन का दायरा केवल सफाई विभाग तक सीमित नहीं है। हड़ताल में करीब 11 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें सफाईकर्मियों के अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, बिल्डिंग परमिशन, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी भी हैं। नगर निगम के सभी 85 वार्डों और 21 जोन का अमला भी काम बंद कर चुका है।

यह भी पढ़ें:दिल्ली के चांदनी चौक में ढही निर्माणाधीन इमारत, 2 की मौत और 15 लोगों के दबे होने की आशंका

राजधानी में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित होने से हालात बिगड़ रहे हैं। शहर में घर-घर से कचरा इकट्ठा करने के लिए 400 से अधिक गाड़ियां संचालित होती हैं। प्रत्येक गाड़ी रोजाना दो से तीन चक्कर लगाती है। इसके बाद कचरे को शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर पहुंचाया जाता है। वहां से कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र भेजा जाता है।

भोपाल से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण डोर टू डोर कलेक्शन से लेकर कचरे को निस्तारण केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कई इलाकों में डस्टबिन भर चुके हैं और कचरा बाहर फैलकर सड़कों तक पहुंच गया है।

हड़ताल से पहले मंगलवार को भी कर्मचारियों ने भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। वे मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी बात सुनने और ज्ञापन लेने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बनाई। पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। नाराज कर्मचारी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठकर विरोध जताते रहे थे।

यह भी पढ़ें:MP में 1 लाख से ज्यादा सफाईकर्मियों की स्ट्राइक, सैलरी बढ़ाने समेत 4 सूत्री मांगों पर अड़े

विदिशा जिले के सिरोंज में हड़ताल का असर दिखने पर स्थानीय विधायक उमाकांत शर्मा खुद सफाई के लिए सड़क पर उतर आए। बुधवार रात उन्होंने करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाकर सफाई की। दूसरी ओर शिवपुरी में भी नगर पालिका के लगभग 350 सफाई कर्मचारियों के काम बंद करने से शहर की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। दीपावली के दौरान प्रमुख सड़कों और बाजारों में कचरा जमा होने लगा है। यहां भी कर्मचारियों की मांगों में नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करना शामिल है।

भोपाल नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों के समाधान को लेकर शहर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण कराने में शहर सरकार पूरी तरह विफल रही है। फिलहाल भोपाल समेत प्रदेश के अन्य शहरों में हड़ताल जारी है। दीपावली से पहले सफाई व्यवस्था बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। यदि शुक्रवार से जलप्रदाय कर्मचारी भी काम बंद कर देते हैं तो कचरे की समस्या के साथ राजधानी के लोगों को पानी की किल्लत का सामना भी करना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें:अग्निवीरों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब 6 साल कर सकेंगे सेना में नौकरी