Sidhi: CM शिवराज सिंह को इस सड़क से आने की चुनौती

 NH-39 Bad Road: परेशान युवा ने CM के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को दी चुनौती, इस पर चलकर आइए, मां के हाथ के पकवान खाइए

Updated: Aug-13, 2020, 12:51 AM IST

Sidhi: CM शिवराज सिंह को इस सड़क से आने की चुनौती

भोपाल। सीधी सिंगरौली सड़कमार्ग अपने कायाकल्प की बाट कई साल से जोह रहा है। पहले 15 साल बीजेपी सरकार और डेढ़ साल की कांग्रेस सरकार में कई दावे और वादे तो किए गए। सरकारें बदल गईं, लेकिन सड़क की बदहाली में जरा भी फर्क नहीं आया। बारिश में ये सड़कें आए दिन हादसों को न्यौता देती हैं। जिससे कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

स्थानीय युवा योगेन्द्र चंदेल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इलाके बदहाल सड़कों की फोटो शेयर करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और सीधी से बीजेपी सांसद रीति पाठक को चुनौती दी है। युवक ने लिखा है कि ‘जिस दिन आप इस सीधी-सिंगरौली सड़क मार्ग से चलकर मेरे घर आएंगे, उसदिन मैं आपको मेरी मां के हाथों के बने स्वादिष्ट देशी व्यंजन खिलाउंगा। युवक ने उस ट्वीट में तंज कसते हुए लिखा है कि मेरे यहां आने के लिए शर्त है कि आपको नाव और ट्रैक्टर से नहीं आना है।

 

सीधी सिंगरौली सड़क मार्ग के विकास की योजना पिछले कई वर्षों से प्रस्तावित है लेकिन अब तक कोई विकास नहीं हुआ है। बारिश में यह मार्ग लोगों के लिए मौत का सबब बन जाता है। NH-39 सीधी सिंगरौली मार्ग में कहीं-कहीं तो सड़कें ही गायब हो चुकी हैं। सीधी जिले के गोपद पुल के आस-पास जहां कर्रथुआ से देवसर और देवसर से झुरही मार्ग की सड़कें गायब हो चुकी हैं। इन जगहों पर आये दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। गौरतलब है कि करीब 7 साल पहले इस सड़क के फोरलेन करने के लिए भूमिपूजन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था। लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी सड़क की ना तो मरम्मत हुई और ना ही फोरलेन बन पाई है। अब स्थानीय लोग सांसद रीती पाठक की नाकामी मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस सड़क के निर्माण के लिए केवल कागजी प्रयास हुए हैं।

आपको बता दें कि सिंगरौली जिला खनिज संसाधनों से भरपूर है, यहां कोयला खदानें और थर्मल पावर प्रोजेक्ट हैं, हाल ही में यहां सोने का अपार भंडार भी मिला है। इसे देश की ऊर्जाधानी भी कहा जाता है। इतना संपन्न होने के बावजूद इस जिले की खस्ता हाल सड़कें मध्यप्रदेश सरकार की नाकामी का जीता जागता उदाहरण हैं।