पंचायत चुनाव: ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की सुनवाई, ट्रिपल टेस्ट नियम का पालन करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस संबंध में पहले ही अध्यादेश रद्द किया जा चुका है, इसलिये याचिका निष्प्रभावी हो गयी है

Updated: Jan 19, 2022, 05:36 PM IST

पंचायत चुनाव: ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की  सुनवाई, ट्रिपल टेस्ट नियम का पालन करने का आदेश

भोपाल। मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई खत्म हो गयी है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को रोकने का फैसला किया है। इसके साथ ही पंचायत चुनाव में ट्रिपल टेस्ट नियम का पालन करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है।  

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर दाखिल की गयी पुनर्विचार याचिका की सुनवाई शुरु हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने चुनावों के मद्देनज़र जो याचिका दाखिल की थी, उसे हमने निरस्त कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा यह जानकारी दिये जाने के बाद कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई को बंद करने का फैसला कर लिया।

लेकिन सुनवाई रोकने के साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को पालन करने के निर्देश भी दिये। उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण के अनुपालन के लिये कृष्णामूर्ति बनाम भारत संघ,2010 के मामले में दिये गये अपने फैसले का ज़िक्र किया और राज्य सरकार को ट्रिपल टेस्ट सिस्टम के आधार पर चुनावी प्रक्रिया को संपन्न कराने का आदेश दिया। 

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कोर्ट ने कहा कि चुनावों में इसी ट्रिपल टेस्ट सिस्टम के आधार पर ओबीसी आरक्षण दिया जाये। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसका पालन सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्य भी करें।

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मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों के मद्देनज़र शिवराज सरकार ने अध्यादेश लागू किया था। लेकिन इस अध्यादेश पंचायती राज नियम की अनदेखी कर आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। विपक्ष लगातार इस अध्यादेश को वापस लेने चुनावों में उचित प्रक्रिया का पालन करने की मांग कर रहा था। जल्द ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया और सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनावों के मद्देनज़र ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी। इसके बाद पंचायत चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी खींचतान शुरु हुई।

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विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर आरोप लगया कि उसने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष सही ढंग से नहीं रखा, इसीलिये कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण पर स्टे लगाने का फैसला दे दिया। विपक्ष द्वारा किये गये एक के बाद एक हमलों के कारण शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गयी। जिसके बाद शिवराज ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिये पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। हालांंकि विधानसभा के शीतकाली सत्र के दौरान सदन में दोनों ही राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से यह संकल्प पारित किया कि बगैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव नहीं कराये जायेंगे। इसके बाद शिवराज सरकार ने पंचायत चुनाव के मद्दनेज़र जारी अपना अध्यादेश वापिस ले लिया। लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका अपने आप निष्प्रभावी हो गयी।