MP पुलिस का थर्ड डिग्री टॉर्चर, चोरी के शक में आदिवासी युवक को पीट-पीटकर मार डाला

चोरी-डकैती के शक में आदिवासी युवक को उठा ले गई थी पुलिस, चौकी में की बेरहमी से पिटाई, स्थिति बिगड़ने पर भेजा अस्पताल, कुछ घंटों में ही युवक ने तोड़ा दम

Updated: Sep 04, 2022, 09:45 AM IST

MP पुलिस का थर्ड डिग्री टॉर्चर, चोरी के शक में आदिवासी युवक को पीट-पीटकर मार डाला

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से पुलिसिया बर्बरता की रूह कंपाने वाली खबर सामने आई है। यहां पुलिस ने चोरी के शक में एक आदिवासी युवक को पीट पीटकर मार डाला। ग्रामीणों का दावा है कि गुनाह कबूलवाने के लिए पुलिस ने युवक को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे हत्या करार दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मानपुर पुलिस लूट की साजिश के मामले में गिट्‌टीफोड़ा के रहने वाले 19 वर्षीय अर्जुन सिंगारे को उठा ले गई थी। आरोप है कि पुलिस ने गुनाह कबूलवाने के लिए अर्जुन को बेरहमी से पीटा। अर्जुन यह टॉर्चर झेल नहीं सका और उसकी तबियत बिगड़ने लगी। इसके बाद आनन फानन में पुलिसकर्मी उसे अस्पताल ले गए। यहां कुछ घंटों में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टक के लिए इंदौर स्थित एमवाई अस्पताल भेज दिया गया।

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पुलिस अब मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुट गई है। पुलिस अधिकारी मारपीट के संबंध में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसकी तबियत बिगड़ गई और तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी। इतना ही नहीं पुलिस उसे किसी खतरनाक गैंग का सदस्य बता रही है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज होने की बात कह रही है।

युवक की मौत पर आदिवासी संगठनों में भारी नाराजगी है। इंदौर और आसपास के जिले के जयस कार्यकर्ता सूचना मिलने के बाद मानपुर पहुंचने लगे।
गुस्साए परिजनों और जयस कार्यकर्ताओं ने मानपुर थाने के सामने ही मुंबई आगरा नेशनल हाईवे जाम करने की कोशिश की। मामला तूल पकड़ता देख मानपुर में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है।

एसपी भगवत सिंह बिरदे ने 3 अफसरों सहित 5 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टि में इन्हें दोषी पाया गया है। इस मामले की ज्यूडिशियल जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में एसपी ने न्यायिक जांच के भी आदेश दे दिया है। 

युवा आदिवासी नेता विक्रांत भूरिया ने इस घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'चोरी के शक में, मतलब अभी सिर्फ आरोप लगे थे और आदिवासी युवक को थाने में पीट-पीटकर मार डाला। कानून व्यवस्था संभालने वाले ही हत्यारे बन गए है। क्या निलंबन से हमारा भाई वापस आ जायेगा? ये घटनाएं तब हो रही है जब शिवराज जी खुद को आदिवासी हितैषी बता रहे हैं।'