दिल्ली में एमपी सरकार की सुरक्षा और समृद्धि का छपा विज्ञापन, भोपाल इंदौर समेत 26 ज़िलों में रुका टीकाकरण

मध्यप्रदेश में वैक्सीन की कमी की वजह से दो दर्जन से ज्यादा जिलों में कोरोना टीकाकरण महा अभियान रुक गया है, सिर्फ़ उन्हीं जिलों में वैक्सीनेशन हो रहा है जहां 25 प्रतिशत से कम लोगों को डोज लगी है

Updated: Jun 28, 2021, 02:27 PM IST

दिल्ली में एमपी सरकार की सुरक्षा और समृद्धि का छपा विज्ञापन, भोपाल इंदौर समेत 26 ज़िलों में रुका टीकाकरण
Photo Courtesy: news nation

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना वैक्सीन की कमी की वजह से राजधानी भोपाल समेत 26 जिलों में टीकाकरण महाअभियान पर ब्रेक लग गया है।  सोमवार 28 जून को सिर्फ उन जिलों में ही वैक्सीन लगाई जा रही है जिनमें वैक्सीनेशन का प्रतिशत 25 फीसदी से कम है। शनिवार को 9 लाख 86 हजार डोज लगाने के बाद केवल 4 लाख डोज ही बचे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दावा किया है कि प्रदेश में दो करोड़ लोगों को फर्स्ट डोज़ वैक्सीनेशन का काम पूरा हो चुका है।

सरकार का दावा है कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में लक्ष्य से ज्यादा टीके लगाए जा चुके हैं। यही वजह है लक्ष्य से ज्यादा वैक्सीनेशन कर चुके 26 जिलों में सोमवार को टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। लेकिन कई जिलों में टीके टारगेट से कम ही लग पाए हैं। यही वजह है कि वैक्सीन की कमी के वक्त 25 प्रतिशत से कम वैक्सीनेशन वाले जिलों में विशेष वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है।      

राज्य एक दिन वैक्सीनेशन में रिकॉर्ड बना रहा है तो दूसरे दिन वैक्सीन की कमी से हाहाकार की सूचना भी आ जा रही है। लेकिन सरकार अपनी छवि को लेकर इतनी सतर्क है कि प्रदेश से लेकर देश की राजधानी तक अखबारों में सरकार की सक्रियता का दावा करना पड़ रहा है। यह ठीक उसी दिन हो रहा है जब राज्य के 26 जिलों में टीके का टोटा पड़ गया है।

राज्य सरकार की तरफ से दिए गए पूरे पेज के विज्ञापन में मध्यप्रदेश में कोरोना पीड़ितों को दी जाने वाली सुविधा और सुरक्षा का बखान है। सरकार का दावा है कि कोविड के इस संकटकाल में मुख्यमंत्री की तरफ से 5 योजनाएं चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कोविड-19 विशेष अनुग्रह योजना, मुख्यमंत्री कोविड-19 अनुकंपा नियुक्ति योजना, मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना और मुख्यमंत्री कोविड ट्रीटमेंट स्कीम।

सरकार का दावा है कि कोविड के इलाज और बचाव, मृत्यु और राहत के लिए परिवारों की सहायता योजना बेहतर काम कर रही है। लेकिन सरकार के दावे के उलट 27 जून को खबर मिली कि प्रदेश में फ्रंटलाइन वर्कस को दिए जानेवाले पचास लाख की अनुकंपा का लाभ 152 में से सिर्फ 7 लोग ही उठा पाए हैं। यह तो महज़ एक, पुलिस विभाग का आंकड़ा है। 

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सवाल है कि अगर सरकार की मंशा साफ है तो यह सिर्फ सुर्खियों तक ही क्यों सीमित है। सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उनलोगों को क्यों नहीं मिल पा रहा है जो जरूरतमंद हैं और सरकारी दफ्तरों में अपने हक के लिे भटक रहे हैं।