कोरोना योद्धा के शव की दुर्दशा, ग्वालियर के जिस अस्पताल में करती थी नौकरी वहीं 6 घंटे लावारिस पड़ा रहा शव

ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल की महिला कर्मचारी की कोरोना से मौत, 6 घंटे लावारिस पड़ा रहा शव, कलेक्टर की सिफारिश के बाद किया था भर्ती, इंदौर में बेटा भी लड़ रहा है जिंदगी और मौत की जंग

Updated: Apr 26, 2021, 05:32 PM IST

कोरोना योद्धा के शव की दुर्दशा, ग्वालियर के जिस अस्पताल में करती थी नौकरी वहीं 6 घंटे लावारिस पड़ा रहा शव
Photo courtesy: Bhaskar

ग्वालियर। मुरार जिला अस्पताल की एक कर्मचारी की कोरोना से मौत हो गई। महिला की मौत उसी अस्पताल में हुई जहां उसने जीवन भर अपनी सेवाएं दी। लेकिन बावजूद इसके जब उसे कोरोना संक्रमण का सामना करना पड़ा तो पहले तो उसे इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। और तो और मौत के बाद भी उसके शव की दुर्दशा हुई। चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी का शव 6 घंटे तक अस्पताल में लावारिश की तरह स्ट्रेचर पर ही पड़ा रहा। उसके साथी कर्मचारियों ने और ना ही किसी डाक्टर और किसी अफसर ने शव को हाथ लगाया।

    

उसके साथी कर्मचारियों ने भी उससे मुंह मोड़ लिया। स्वास्थ्य विभाग की कर्मचारी मंगला की कोरोना रिपोर्ट दो दिन पहले ही पॉजिटिव आई थी। बड़ी मशक्कत के बाद कलेक्टर के कहने पर उसे उसके ही अस्पताल में बेड मिला थी। जिसके बाद मंगला की इलाज के दौरान मौत हो गई। कोरोना संक्रमित का शव ना तो मर्चुरी में रखवाया गया और ना ही कहीं दूसरी जगह। स्वाथ्य विभाग की लापरवाही से 6-7 घंटों तक मंगला का शव स्ट्रेचर पर ही अस्पताल परिसर में पड़ा रहा। दरअसल मृतका का बेटा इंदौर में रहता है, वह भी कोरोना संक्रमित है, इंदौर में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।

मंगला बुरारे नाम की महिला स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं। उनकी ड्यूटी मुरार प्रसूति गृह में थी। यहीं नजदीक ही मुरार जिला अस्पताल भी है। मंगला का जिला अस्पताल में भी आना जाना था।

मंगला का परिवार इंदौर में रहता है। अपनी सरकारी नौकरी की वजह से वह ग्वालियर में अकेली रहती थीं।बीते दिनों जब महिला की तबीयत खराब हुई थी तब पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें घर से बाहर निकाला था। और बड़ी मशक्कत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था। पड़ोसियों की माने तो स्वास्थ्य विभाग की होने के बाद भी मुरार जिला अस्पताल में उन्हे एडमिट नहीं किया जा रहा था। कलेक्टर और कई वरिष्ठ अधिकारियों से मिन्नत करने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा सका था।

अगले दिन महिला की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। जिसके बाद रविवार को मंगला की मौत हो गई। जिसके बाद अस्पताल के स्टाफ ने इंसानियत की हदें पार करते हुए शव को स्ट्रेचर पर रखा और जिला अस्पताल की गैलरी में छोड़ दिया किसी ने शव पर कपड़ा तक डालने की जहमत नहीं उठाई। जब इस बात की जानकारी पड़ोसियों को लगी तब वे वहां पहुंचे। और शव को जिला अस्पताल से हटा कर डेड हाउस में रखवाया  गया है। महिला का बेटा भी कोरोना संक्रमित है, इंदौर में उसका इलाज हो रहा है। बेटे के आने पर ही महिला का अंतिम संस्कार होगा।