100 साल के बुजुर्ग हरबंस ठेले पर बेचते हैं सब्जी, ताकि बिन मां बाप के बच्चों को मिल सके दो जून की रोटी

पंजाब के मोगा जिले की गलियों में आलू, प्याज बेचते 100 साल के हरबंस का कहना है कि अगर वे मेहनत करना बंद कर देगें तो बीमार पड़ जाएंगे, बेटे के गुजर जाने के बाद उसके दो मासूम बच्चों की परवरिश उनके जीवन का लक्ष्य है, खुद्दारी इतनी है कि सरकारी मदद लेने से भी मना कर चुके हैं

Updated: Jul 17, 2021, 03:17 PM IST

100 साल के बुजुर्ग हरबंस ठेले पर बेचते हैं सब्जी, ताकि बिन मां बाप के बच्चों को मिल सके दो जून की रोटी
Photo Courtesy: Times of India

मोगा। पंजाब के मोगा जिले के हरबंस सिंह 100 साल के हैं। जिस उम्र में लोग घर पर आराम से जिंदगी गुजर बसर करते हैं, उस उम्र में 100 साल के हरबंस सिंह गली-गली आलू प्याज बेचते नजर आते हैं। कभी-कभी तो उनके ठेले में रखी सब्जियों का वजन उनकी उम्र से दोगुना हो जाता है। फिर भी वो बिना किसी मदद के 200 किलो सब्जियों का भार ढोते हैं, उनके मन में बस इच्छा है कि वे अपने छोटे-छोटे पोते पोतियों को दो जून की रोटी और अच्छी परवरिश दे सकें।

दरअसल बुजुर्ग हरबंस सिंह के दो बेटे हैं, जिसमें से बड़ा बेटा परिवार से अलग रहता है, आटो चालक बेटे को ना तो पिता की चिंता है और ना परिवार की कोई फिक्र। वहीं छोटे बेटे की मौत हो चुकी है, और बहू भी बच्चों को अनाथ छोड़कर चली गई है। अब दो मासूम बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी इस बुजुर्ग के हिस्से आई है। जो जिदंगी में उम्र का शतक लगाते हुए गरीबी की मार झेल रहे हैं। बावजूद इसके इन्हें किसी की मदद कतई मंजूर नहीं है। कई बार कुछ संस्थाओं और सरकार की ओऱ से मदद की पेशकश की गई, लेकिन खुद्दार बुजुर्ग ने मदद लेने से इनकार कर दिया।

   

हरबंस अमृतसर मोगा मार्ग पर सब्जी का ठेला चलाते हैं। गलियों में उनकी आवाज सुनते ही उनसे खरीददारी करने वाले उमड़ पड़ते हैं। उनके जानने वालों की मानें तो वे करीब 40-50 साल से आलू प्याज बेचने का काम कर रहे हैं। इससे पहले वे हम्माली का काम करते थे।

इन दिनों सोशल मीडिया पर हरबंस सिंह का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें दिखाया गया है कि कि कैसे उम्र के दसवें दशक में बुजुर्ग हरबंस सिंह अपने अनाथ पोत-पोतियों का पेट पालने के लिए ठेले पर सब्जी बेचते हैं। इस वीडियो को हजारों व्यूज और लाखों लाइक्स मिल चुके हैं। कई लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। मदद की पेशकश करने वालों में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल हैं।  

मूगा के अमृतसर रोड स्थित दशमेश नगर की गली नं. 6 में रहने वाले हरबंस सिंह का जन्म आजादी से पहले ब्रिटिश इंडिया के लाहौर जिले में हुआ था। उनका परिवार विभाजन के समय सराय ठाणे वली गांव से भागकर मोगा आ गया था। 1947 में वे 26 साल के थे, विभाजन के बाद वे भारत आ गए, उनके कई रिश्तेदार पाकिस्तान में भी रहते हैं।

हरबंस अपने पोते-पोती के लिए दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनके छोटे बेट की कुछ साल पहले एक्सीडेंट में मौत हो गई थी, उसके दो बच्चे हैं, दोनों ही पढ़ रहे हैं। उनकी परवरिश के लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं। बेटे की मौत के बाद बहू घर छोड़कर चली गई है।   

हरबंस सिंह की मानें तो वे रोजाना सुबह करीब चार बजे उठते हैं और तैयार होकर मंडी जाते हैं। वहां से आलू प्याज थोक के भाव लाते हैं। फिर दिनभर उसी की बिक्री करते हैं। उनका कहना है कि रोजाना इतनी मेहनत करने की वजह से ही वे सौ साल की उम्र में भी इतने एक्टिव हैं। जिस दिन काम करना बंद कर देंगे। जिंदा नहीं रह पाएंगे। सेहत खराब हो जाएगी।

कोरोना महामारी के दौर में भी वे रोजाना रेहडी लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि ना तो वे  मोबाइल रखते हैं औऱ ना बाहर का कुछ खाते हैं, घर का बना सादा भोजन करते हैं। वहीं सरसों के तेल की मालिश करना नहीं भूलते, यही उनकी सेहत का राज है।