अब कंपनियां बिना सरकारी मंजूरी के कर सकेगी कर्मचारियों की छंटनी

Labour Bills in Parliament: लोकसभा में उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 पेश

Updated: Sep 20, 2020 05:39 PM IST

अब कंपनियां  बिना सरकारी मंजूरी के कर सकेगी कर्मचारियों की छंटनी

नई दिल्ली। कृषि विधेयकों को लेकर संसद में जारी तनातनी के बीच अब केंद्र सरकार ने लोक सभा में तीन नए विवादित श्रम विधेयक पेश कर दिए हैं। विपक्षी पार्टियों ने इनका पुरजोर विरोध किया है। ये तीन नए विधेयक पिछले साल के श्रम विधेयकों की जगह पेश किए गए हैं। 

इन नए विधेयकों को व्यावसायिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा नियम, औद्योगिक संबंधों नियम और सामाजिक सुरक्षा नियम के नाम से पेश किया गया। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इन्हें पेश किया। नए विधेयक के अनुसार अब तीन सौ से कम कर्मचारियों वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मियों की जब चाहे छंटनी कर सकेंगी। अभी 100 से कम कर्मचारी वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान या संस्थान ही पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना कर्मचारियों को रख और हटा सकते थे। इस साल की शुरुआत में संसदीय समिति ने 300 से कम स्टाफ वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने या कंपनी बंद करने का अधिकार देने की बात कही थी।

श्रम मंत्री गंगवार के मुताबिक 29 श्रम कानूनों को इन विधेयकों में शामिल किया गया है और इनमें से एक पहले ही संसद में पारित किया जा चुका है। गंगवार ने यह भी दावा किया इन नए विधयकों को लेकर सरकार ने तमाम हितधारकों से बात की है और सरकार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब 6 हजार टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं। उन्हींने बताया कि इन विधेयकों को संसद की स्थाई समिति के पास भेजा गया था, जिसने 233 में से 174 सुझावों को स्वीकृति दी।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं शशि थरूर और मनीष तिवारी ने इन विधेयकों का विरोध किया। तिवारी ने कहा कि ये नए विधेयक पहले पेश किए गए विधेयकों से अलग हैं और इसलिए गंगवार को इन्हें वापस लेकर पहले व्यापक चर्चा करानी चाहिए। तिवारी ने कहा कि ये नए विधेयक श्रमिकों के अधिकारों पर हमला हैं। 

व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े विधेयक को लेकर थरूर ने कहा कि ना तो इसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों की रक्षा को लेकर कोई प्रावधान है और ना ही प्रवासी श्रमिकों के लिए। उन्होंने कहा कि विधेयक भेदभाव करने वाला भी है क्योंकि इसमें महिलाओं के उत्थान का कोई जिक्र नहीं है।

वहीं औद्योगिक संबंधों से जुड़े बिल को लेकर थरूर ने कहा कि यह विधेयक मजदूरों के हड़ताल पर जाने को लेकर तमाम तरह की पाबंदियां लगाने की बात करता है। साथ ही केंद्र या राज्य सरकारों को यह ताकत देता है कि वे श्रमिकों की छंटनी को लेकर नियम कानूनों में मनमाने तरीके से संशोधन कर सकें।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने भी इन विधेयकों का विरोध किया। सीपीएम के सांसद ने कहा कि इन नए विधेयकों को पहले स्थाई समिति के पास भेजा जाना चाहिए।