बिहार के डीजीपी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हिदायत बेअसर, पत्रकारों को दिया दो टूक जवाब

नीतीश कुमार ने डीजीपी एके सिंघल को पत्रकारों के फ़ोन पर ध्यान देने की बात कही थी, लेकिन एक टीवी चैनल ख़बर के मुताबिक़ उन पर मुख्यमंत्री की बातों का कोई असर नहीं पड़ा है

Updated: Jan 16, 2021, 06:26 PM IST

बिहार के डीजीपी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हिदायत बेअसर, पत्रकारों को दिया दो टूक जवाब
Photo Courtesy: Outlook

पटना। बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एके सिंघल अपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ही नहीं सुनते हैं। मुख्यमंत्री से मीडियाकर्मियों के सामने फोन पर फटकार खाने के बावजूद डीजीपी एके सिंघल की कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं आया। नीतीश कुमार ने शुक्रवार को डीजीपी को सरे आम फटकार लगाते हुए मीडियाकर्मियों का फोन उठाने के लिए कहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद नीतीश कुमार का यह आदेश बेअसर साबित हो गया। 

दरअसल शुक्रवार को नीतीश कुमार रूपेश सिंह हत्याकांड के सिलसिले में पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान नीतीश कुमार पहले तो अपनी सरकार के कार्यकाल में हो रहे अपराधों के बारे में पूछे जाने पर भड़क गए। बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अगर किसी अपराध के बारे में आपके पास कोई सूचना या शिकायत हो तो आप पुलिस को बता सकते हैं। इस पर कुछ पत्रकारों ने शिकायत की कि उनके पुलिस अधिकारी तो पत्रकारों के फोन ही नहीं उठाते। खासकर डीजीपी एके सिंघल तो मीडिया से बात ही नहीं करते।

इस पर नीतीश ने पत्रकारों के सामने ही डीजीपी सिंघल को फोन लगा दिया और उन्हें मीडियाकर्मियों का फोन नहीं उठाने पर फटकार लगाते हुए आइंदा ऐसा नहीं करने की हिदायत भी दे डाली। नीतीश ने डीजीपी से कहा कि भले ही अलग से एक फोन नंबर जारी करके वहां किसी अधिकारी को तैनात करना पड़े, लेकिन पत्रकारों के फोन ज़रूर लिये जाने चाहिए। मुख्यमंत्री के आदेश देने के कुछ ही देर बार जनसंपर्क विभाग ने डीजीपी का लैंडलाइन नंबर और निजी नंबर जारी भी कर दिया। 

लेकिन एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार जब डीजीपी के जारी नंबर पर कॉल किया गया तो डीजीपी के बदले उनके स्टेनो ने फोन उठाया। काफी प्रयास करने के बाद जब डीजीपी खुद फोन पर आए तो उन्होंने कहा कि मीडिया को अगर कोई जानकारी देनी हो तो वे जारी किए गए नंबरों पर दे सकते हैं। लेकिन अगर उन्हें कोई जानकारी लेनी है, इसके लिए एडीजी से संपर्क करें। अब चर्चा यह हो रही है कि मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद डीजीपी के तेवर का यही मतलब है कि सिंघल पर नीतीश कुमार की बातों का कोई असर नहीं पड़ा है।