PM मोदी की अपील पर बीजेपी नेता ने फेरा पानी, 700 वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे
मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर सैकड़ों गाड़ियों के साथ भोपाल में पदभार ग्रहण करने पहुंचे। इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से वैश्विक संकट को लेकर अपील कर रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें। वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के नेता ही उनकी नसीहत की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बीजेपी नेता सौभाग्य सिंह को हाल ही में पाठ्य पुस्तक निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके बाद वह 700 गाड़ियों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे।
दरअसल, सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन के निवासी हैं। उन्हें प्रदेश में पाठ्य पुस्तकों का भविष्य संभालने की जिम्मेदारी दी है। मोहन यादव सरकार ने उन्हें पाठ्य पुस्तक निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्हें भोपाल आकर कार्यभार संभालना था। वह उज्जैन से करीब 700 गाड़ियों का काफिला लेकर निकले। बताया जा रहा है कि हाईवे पर कई किलोमीटर तक उनके साथ गाड़ियां चल रही थी। एक साथ इतनी गाड़ियों की वजह से लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
उज्जैन से भोपाल की ओर जैसे-जैसे उनका काफिला बढ़ते जा रहा था, वैसे-वैसे हाईवे पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही थी। समर्थकों की संख्या गाड़ियों के साथ बढ़ती जा रही थी। हाईवे पर चल रहे अन्य वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ा है। सोशल मीडिया पर भी सौभाग्य सिंह ठाकुर के काफिले के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं।
वीडियो को लेकर जब विवाद बढ़ा तो मीडिया से बात करते हुए सौभाग्य सिंह ठाकुर ने कहा कि मैं उज्जैन के मंगरौला गांव का रहने वाला हूं। मैं घर से परिवार के लोगों के साथ निकला था तो 25 गाड़ियां मेरे साथ थी। रास्ते में यह काफिला बढ़ते चला गया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता चला कि मेरे साथ इतनी गाड़ियां चल रही हैं। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया।
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा, 'क्या इन बीजेपी नेताओं ने पीएम की अपील नहीं सुनी जो 700 गाड़ियाँ लेकर छोटे से कार्यक्रम में भोपाल जा रहे हैं। वैसे भाजपा वालों को सब माफ है कुछ भी करें। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सारे नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?




