5 से 18 वर्ष के बच्चों पर कोरबेवैक्स वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण को डीसीजीआई से मिली मंजूरी 

हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई लिमिटेड बच्चों के वैक्सीन को बना रही है, ट्रायल का उद्देश्य वैक्सीन लगाने के बाद बच्चों के शरीर में कितना एंटीबाडी विकसित होता है इसका पता लगाना है

Publish: Sep 02, 2021, 09:42 AM IST

5 से 18 वर्ष के बच्चों पर कोरबेवैक्स वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण को डीसीजीआई से मिली मंजूरी 
courtesy: business standard

नई दिल्ली 
एक तरफ देश के विभिन्न राज्यों में स्कूल खोले जा रहे हैं दूसरी तरफ बच्चों के कोरोना की चपेट में आने की आशंका से पैरेंट्स चिंता में हैं।इसे लेकर देश में इन दिनों एक बहस चल रही है कि बिना वैक्सीन का डोज़ लिए बच्चों के लिए स्कूल खोलना कितना उचित है। इस बीच एक अच्छी खबर ये है कि स्वदेशी कोरबेवैक्स वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल को डीसीजीआई ने मंजूरी दे दी है। बच्चों के लिया इस वैक्सीन का निर्माण हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कर रही है। यह क्लीनिकल ट्रायल देश में 10 जगहों पर किया जायेगा। 
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से मिली इस अनुमति का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये वैक्सीबन कितनी इफेक्टिव है और इसे लगाने के बाद बच्चों के शरीर में कितनी एंटीबाडी विकसित होती है। डीसीजीआई ने ये अनुमति कोविड 19 पर बनी विशेषज्ञों की समिति की सिफारिशों के आधार पर दी है। डीसीजीआई की ओर से अब तक देश में विकसित किये गए जायडस कैडिला के जायकोव डी वैक्सीन को आपातकालीन स्थित में  बच्चों पर इस्तेमाल की मंजूरी दी गई। 
जायकोव डी 12 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए उपलब्ध होने वाला देश का पहला कोविड वैक्सीन है। कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक भी बच्चों के लिए वैक्सीन का निर्माण कर रही है। 2 से 18 आयु वर्ग के बच्चों के लिए भारत बायोटेक द्वारा बनाये गए वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल से मिले आंकड़ों का अभी अध्ययन चल रहा है। 
हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को केंद्र सरकार ने बच्चों की वैक्सीन विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपए की मदद दी है। वैक्सीन अगले कुछ महीनों में उपलब्ध  हो सकती है। सरकार ने बायोलॉजिकल ई लिमिटेड से 30 करोड़ वैक्सीन का करार किया है। मिली जानकारी के मुताबिक बायोलॉजिकल ई अगस्त से दिसंबर के बीच वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर देगा। बच्चों के लिए वैक्सीन जल्द से जल्द उपलब्ध हो इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को 1500 करोड़ रुपए का भुगतान पहले ही कर चुका है।