ECI To Supreme Court: चुनावी रैलियों पर रोक के आदेश को चुनाव आयोग ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

चुनाव आयोग ने कहा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश अनुच्छेद 329 के तहत मिले संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन,

Updated: Oct 24, 2020, 10:57 AM IST

ECI To Supreme Court:  चुनावी रैलियों पर रोक के आदेश को चुनाव आयोग ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
Photo Courtesy: The Indian Wire

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के एक हिस्से में चुनावी रैली-सभाओं पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच द्वारा लगाई गई रोक को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन बताया है। आयोग ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश आयोग के काम में हस्तक्षेप है। गौरतलब है कि बीजेपी प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर और मुन्ना लाल गोयल ने भी इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने इन पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी, लेकिन कोर्ट इन पर सुनवाई के बारे में फैसला 26 अक्टूबर को लेगा। 

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस रुख पर हैरानी जाहिर की है। पार्टी के सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव आयोग हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहा है। उन्होंने इसे जनता के हित को भूलकर सत्ताधारी पार्टी के हितों का साथ देना भी बताया है। 

चुनाव की याचिका की पुष्टि मध्य प्रदेश के ज्वाइंट सीईओ मोहित बुंदस ने की। याचिका में हाईकोर्ट के पैरा 14 में पारित आदेश को भी आयोग के कामों मे दखल बताया गया है, जिसमें कहा गया है कि अगर राजनीतिक पार्टी भौतिक रूप से सभा करना चाहती है, उसके लिए इजाजत लेते समय बताना होगा कि उस जगह वर्चुअल सभा क्यों नहीं हो सकती है। कलेक्टर को उनके आवेदन के बाद स्पीकिंग ऑर्डर पास करना होगा और सभा की अनुमति के लिए मामला चुनाव आयोग को भेजना होगा। इसके बाद राजनीतिक दल सभा कर पाएंगे।

चुनाव आयोग की याचिका में दी गई दलीलें

1. हाईकोर्ट का आर्डर सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने पोन्नू स्वामी वर्सेस रिटर्निंग आफिसर, मोहिंदर सिंह बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग बनाम अशोक कुमार के मामले में चुनाव आयोग को अनुच्छेद 329 बी में प्राप्त अधिकारों को स्पष्ट किया है। इन फैसलों में साफ तौर पर कहा गया है कि चुनाव संचालन के बीच में आयोग के कामों में कोर्ट दखल नहीं देगा। ग्वालियर हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को नहीं सुना और फैसला सुना दिया। यह प्राकृतिक न्याय के विपरीत है।

2. राजनीतिक दलों को चुनावी सभाओं की अनुमति के लिए जमा होने वाली भीड़ के उपयोग के लिए मास्क और सैनिटाइजर की लागत की दोगुनी राशि जमा करने को कहना गलत है। ग्वालियर हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आने वाले 9 जिलों ग्वालियर, गुना, मुरैना, भिंड, अशोकनगर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर और विदिशा जिले के लिए जो आदेश पारित किया है उसमें कहा गया है कि राइट आफ हेल्थ ज्यादा जरूरी है लेकिन प्रत्याशियों को राइट टू कैंपेन का अधिकार भी प्राप्त है।