इंदौर में दूषित पानी से अब तक 18 मौतें, 3 की हालत नाजुक, आज महिला कांग्रेस निकालेगी कैंडल मार्च
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 18 लोगों की मौत के बाद इलाके में दहशत है। मरीजों की संख्या घटी है लेकिन ICU में भर्ती गंभीर मरीज बढ़े हैं।
इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने गंभीर मानवीय संकट का रूप ले लिया है। अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है। मौतों के बाद पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बड़ी संख्या में लोगों ने सप्लाई का पानी इस्तेमाल करना बंद कर दिया है और अब टैंकर व आरओ के पानी पर निर्भर हैं।
हालांकि, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की कुल संख्या में कमी दर्ज की गई है लेकिन गंभीर मरीजों की स्थिति अब भी चिंता बढ़ा रही है। अब तक कुल 429 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए थे। मंगलवार शाम तक 330 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल 99 मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। दूसरी ओर आईसीयू में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 16 मरीज आईसीयू में हैं जिनमें से 3 वेंटिलेटर पर हैं। सोमवार को 15 और रविवार को 7 मरीज आईसीयू में भर्ती थे।
दूषित पानी से जिन लोगों की मौत हुई है उनमें बुजुर्गों, महिलाओं और एक 5 माह के मासूम बच्चे तक शामिल हैं। मृतकों में उर्मिला यादव (60), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजुला (74), ताराबाई कोरी (60), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50), जीवन लाल (80), अव्यान साहू (5 माह), अरविंद लिखर, गीताबाई, अशोक लाल पंवार, संतोष बिगोलिया, शंकर भाया (70), सुमित्रा बाई, हीरालाल (65), ओमप्रकाश शर्मा और हरकुंवर बाई (70 वर्ष) शामिल हैं।
प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए बनाई गई सूची में भी बदलाव हुआ है। पहले सामने न आए दो नाम रामकली जगदीश और श्रवण नत्यु अब सूची में जोड़े गए हैं। इनके शामिल होने के बाद मुआवजा फेहरिस्त में कुल 15 नाम हो गए हैं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर घर-घर सर्वे किया है। सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी के अनुसार, 61 स्वास्थ्य टीमें बनाई गई जिनमें नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ, आशा और एएनएम शामिल थे। इन टीमों ने दो दिनों में 5013 घरों तक पहुंचकर सर्वे किया और 24,786 लोगों से संपर्क कर उन्हें जरूरी परामर्श दिया। हर घर में दवाइयां और क्लिनवेट ड्रॉप भी वितरित की गईं।
इस सर्वे के लिए कोबो टूल नाम के ऑनलाइन मोबाइल एप का इस्तेमाल किया गया जिसके जरिए भागीरथपुरा के हर घर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। इसमें यह दर्ज किया गया कि किस घर में कितने लोग बीमार हैं, बीमारी की गंभीरता क्या है और पानी की स्वच्छता को लेकर लोगों की जानकारी कितनी है। इसी डेटा के आधार पर हीट-गैप मैप तैयार किया गया।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में सामने आया है कि भागीरथपुरा की 17 गलियां संक्रमण से प्रभावित हैं। करीब 40 से 50 प्रतिशत क्षेत्र प्रभावित पाया गया। सर्वे में 460 घर प्रभावित मिले जिनमें लगभग 600 लोग लक्षणयुक्त पाए गए। हालांकि, भागीरथपुरा टंकी के पास सामने वाली गली में कोई मरीज नहीं मिला।
मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े 5 मामलों की एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है और इससे किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी तय की जाएगी। साथ ही यह भी संकेत दिए गए कि यदि मुआवजा अपर्याप्त पाया गया तो उस पर भी अदालत कार्रवाई करेगी।
इसके अलावा मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। मंगलवार दोपहर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भागीरथपुरा पहुंचे। इलाके में भारी पुलिस बल और वज्र वाहन तैनात थे और सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। मृतकों के परिजनों से मिलने को लेकर कांग्रेस नेताओं की पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। बाद में वे दूसरे रास्ते से इलाके में पहुंचे और मृतक अशोक लाल पंवार, जीवन लाल और गीताबाई के परिजनों से मुलाकात की।
भागीरथपुरा से लौटने के बाद जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग की।
दूसरी ओर बुधवार को महिला कांग्रेस पूरे प्रदेश में एक साथ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने बताया कि सभी जिलों में एक साथ कैंडल मार्च निकालकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।




