फ़ेसबुक भड़काऊ कंटेंट हटा देता तो नहीं होते दिल्ली के दंगे, फ़ेसबुक के पूर्व कर्मचारी का दावा

Facebook Under Scanner: फेसबुक के पूर्व कर्मचारी ने दिल्ली सरकार की कमेटी से कहा, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक दलों के इशारे पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाते हैं

Updated: Nov 13, 2020, 11:30 AM IST

फ़ेसबुक भड़काऊ कंटेंट हटा देता तो नहीं होते दिल्ली के दंगे, फ़ेसबुक के पूर्व कर्मचारी का दावा
Photo Courtesy: Himachal Abhi Abhi

नई दिल्ली। फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लकी ने कहा है कि अगर फेसबुक ने भड़काऊ कंटेंट को हटाने के लिए वक्त रहते सही कदम उठाए होते तो दिल्ली के भयानक दंगों को रोका जा सकता था। मार्क ने ये बात आप विधायक राघव चड्ढा की अगुवाई वाली दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति के सामने कही है। उन्होंने फेसबुक के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। मार्क का आरोप है कि फेसबुक के पॉलिसी हेड समेत कई वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक दलों के इशारों पर काम करते हैं। 

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भावना समिति के सामने मार्क ने यह खुलासा भी किया कि फेसबुक ने अगर सही समय पर कार्रवाई की होती तो सिर्फ दिल्ली के दंगों को ही नहीं, म्यांमार के जनसंहार और श्रीलंका में हुए जातीय दंगों को भी रोका जा सकता था। 

मार्क का कहना है कि फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारी न सिर्फ राजनीतिक दलों के इशारे पर काम करते हैं, बल्कि उनके कहने पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव भी डालते हैं। फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्रीय प्रमुख राजनीतिक दलों से दोस्ती बनाकर रखते हैं। जिसके चलते फेसबुक को कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। इसका समाज के शांति, सद्भाव पर बुरा असर पड़ता है। अगर फेसबुक अपने कंटेंट मॉडरेटर्स को उनके काम में आजादी दे या फिर कंपनी की वास्तविक गाइडलाइन के मुताबिक काम करने दे तो समाज में शांति और सद्भाव बना रहेगा।

मार्क का कहना है कि फेसबुक के कंटेंट मॉडरेटर्स में इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी के सीईओ समेत कंपनी की कार्यकारी टीम को इस बारे में सबकुछ पता है। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी जब तक कंपनी की आय पर कोई असर नहीं पड़ता।