पिछले 3 साल में 3.9 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी, व्यक्तिगत कारण बताकर केंद्र ने झाड़ा पल्ला

देश में बिगड़ते सांप्रदायिक माहौल के बीच लाखों की संख्या में लोगों ने शुरू किया पलायन, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में 3 लाख 92 हजार और 6 साल में 9 लाख 24 हज़ार लोग छोड़ चुके हैं भारत की नागरिकता

Updated: Jul 20, 2022, 09:38 PM IST

पिछले 3 साल में 3.9 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी, व्यक्तिगत कारण बताकर केंद्र ने झाड़ा पल्ला

नई दिल्ली। भारत में बिगड़ते सांप्रदायिक माहौल के बीच पलायन से जुड़ी एक और बड़ी संख्या सामने आई है। भारत के लाखों लोग ऐसे हैं जो अब इस देश में रहना नहीं चाहते हैं। केंद्र सरकार ने खुद संसद में बताया है कि बीते एक साल यानी सिर्फ 2021 में 1 लाख 63 हजार लोगों ने देश छोड़ दिया है। जबकि 3 वर्षों के दौरान यह आंकड़ा 3 लाख 90 हजार लोगों के नागरिकता छोड़ने का है। साल 2015 से लगभग साढ़े नौ लाख लोग भारत से बाहर बसने का इंतजाम कर चुके हैं।

 हालांकि, इस पलायन पर केंद्र ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से देश छोड़ा है। लोकसभा में हाजी फजलुर रहमान के सवाल के लिखित उत्तर के साथ गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में बताया है कि तीन साल में 3 लाख 92 हजार 643 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ दी और सबसे अधिक भारतीयों को अमेरिका ने नागरिकता दी है।

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आँकड़ों के अनुसार अकेले 2021 में 1.63 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी। उनमें से 78,000 से अधिक भारतीयों ने अमेरिका की नागरिकता ली। इससे दो साल पहले 2019 में 1.44 लाख भारतीयों ने भारत छोड़ने का फैसला किया। हालाँकि 2020 में यह आँकड़ा ज़रूर गिरा था और 2020 में 85,256 भारतीयों ने ही नागरिकता छोड़ी थी। मगर माना जा रहा है कि साल 2020 में कोरोना संकट और वैश्विक लॉकडाउन के कारण आवागमन और सरकारी कामकाज के दिक्कत की वजह से इसमें कमी देखी गयी थी।

2019 से 2021 तक भारतीय नागरिकों को कुल 103 देशों ने अपनी नागरिकता दी है। आस्ट्रेलिया में तीन सालों में 58,391 भारतीयों, कनाडा में 64,071 भारतीयों, ब्रिटेन में 35,435 भारतीयों, जर्मनी में 6,690 भारतीयों, इटली में 12,131 भारतीयों, न्यूजीलैंड में 8,882 भारतीयों, चीन में 1,454 भारतीयों और पाकिस्तान में 48 भारतीयों को नागरिकता मिली है।

बता दें कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैं उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब अमेरिकी भारतीय वीजा के लिए कतार में खड़े होंगे। इसके बाद वह भारत के प्रधानमंत्री बन गए और 2014 से लगातार इस पद पर बने हुए हैं। लेकिन नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या कम होने के बजाए बेतहाशा बढ़ने लगा है। अधिकांश एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश में बढ़ते सांप्रदायिक नफरत के कारण लोगों में यहां रहने की इच्छा घटती जा रही है और यही वजह है कि अमन पसंद लोग भारत की नागरिकता छोड़कर विदेशों में शिफ्ट होने लगे हैं।