भारतीय नौसेना को मिला नया ध्वज, पीएम मोदी ने देश को सौंपा पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत

कोच्चि शिपयार्ड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि अब तक नौसेना के झंडे पर गुलामी की तस्वीर थी। इस तस्वीर को हमने हटा दिया है।

Updated: Sep 02, 2022, 01:10 PM IST

भारतीय नौसेना को मिला नया ध्वज, पीएम मोदी ने देश को सौंपा पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत

नौसेना को शुक्रवार को अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोच्चि शिपयार्ड में करीब डेढ़ घंटे चली कमिशनिंग सेरेमनी में ये एयरक्राफ्ट कैरियर नेवी को सौंपा। इसके साथ ही अब नौसेना के ध्वज को बदल दिया गया है। पीएम मोदी ने नौसेना के नए ध्वज का भी अनावरण किया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने केरल के कोचीन में आज आईएनएस विक्रांत का जलावतरण किया। यह भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने कोचीन शिपयार्ड में 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्वदेशी अत्याधुनिक स्वचालित यंत्रों से युक्त विमान वाहक पोत का जलावतरण किया।

आईएनएस विक्रांत का सेवा में आना रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। विक्रांत के सेवा में आने से भारत अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास स्वदेशी रूप से डिजाइन करने और एक विमान वाहक बनाने की क्षमता है, जो भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया' पहल का एक वास्तविक प्रमाण होगा।

पोत के जलावतरण के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने नए नौसैनिक ध्वज (निशान) का भी अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने पुराने ध्वज को गुलामी का प्रतीक करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'शिवाजी की समुद्री ताकत से दुश्मन कांपते थे। आज मैं नौ सेना नया ध्वज छत्रपति वीर शिवाजी महाराज को समर्पित करता हूं। ये नया ध्वज नौसेना के बल और आत्मसम्मान को बल देगा। अब तक नौसेना के झंडे पर गुलामी की तस्वीर थी। इस तस्वीर को हमने हटा दिया है।'

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि, 'ये भारतीयों के लिए गर्व का मौका है। ये भारत की प्रतिभा का उदाहरण है। ये सशक्त भारत की शक्तिशाली तस्वीर है। ये अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है। ये बताता है कि ठान लो तो कुछ भी असंभव नहीं है। हम आज नए सूर्य के उदय के साक्षी बन रहे हैं। विक्रांत विशाल है, ये खास है, ये गौरवमयी है। ये केवल वारशिप नहीं है। ये 21वीं सदी के भारत के कठिन परिश्रम, कौशल और कर्मठता का सबूत है। इसमें जितनी बिजली पैदा होती है। उससे 5 हजार घरों को रोशन किया जा सकता है। ये दो फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है।'