मेरा सबकुछ बिहार को समर्पित, 2 अक्टूबर से शुरू करूंगा 3 हजार KM की पदयात्रा: प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू और नीतीश कुमार के 30 साल के शासन के बाद भी बिहार पिछड़ा राज्य है, बिहार को नई सोच की जरूरत, अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो सबको आगे आना होगा

Updated: May 05, 2022, 12:10 PM IST

मेरा सबकुछ बिहार को समर्पित, 2 अक्टूबर से शुरू करूंगा 3 हजार KM की पदयात्रा: प्रशांत किशोर

पटना। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी राजनीतिक पारी का ऐलान कर दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा है कि वे बिहार की बेहतरी के लिए काम करेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि इसी साल 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से वह बिहार में 3 हजार किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करेंगे।

प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, 'बिहार को नई सोच और प्रयासों की जरूरत है। मैने अपने साथियों के साथ 17 हजार लोगों को चिह्नित किया है और संपर्क किया है। आने वाले 3-4 महीने में इन लोगों से मिलूंगा। अगर बातचीत में बहुमत बिहार में नई सोच और प्रयासों का होता है और यह लगता है कि किसी राजनीतिक पार्टी की जरूरत है तो उसका ऐलान किया जाएगा।' हालांकि, उन्होंने कहा कि यह प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी।

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प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि, 'मेरे पास जो भी कुछ है, वह मैं पूरी तरह से बिहार को समर्पित कर रहा हूं। बिहार के लोगों से जाकर मिलूंगा और उनकी बात को समझूंगा। आज स्वास्थ से लेकर रोजगार तक बिहार की स्थिति बहुत खराब है। बिहार पूरे देश में सबसे निचले पायदान पर है। यह मैं नहीं कह रहा, बल्कि भारत सरकार के आंकड़े कह रहे हैं। लालू और नीतीश कुमार के 30 साल के शासन के बाद भी बिहार पिछड़ा राज्य है। अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो सबको आगे आना होगा।'

प्रशांत किशोर ने कहा कि, 'हमारे साथ अगर ज्यादा लोग आते हैं और तय करते हैं कि किसी राजनीतिक संगठन की जरूरत है तो उसकी घोषणा की जाएगी। वह प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी।' प्रशांत किशोर के इस ऐलान से बिहार की राजनीति गर्म हो गई है। पीके के बारे में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कह चुके हैं कि वे प्रशांत किशोर से जुड़ी खबरें देखते ही नहीं हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो प्रशांत किशोर से जुड़े सवाल पर सिर्फ इतना कहा कि ये सब छोड़ दीजिए।

बता दें कि प्रशांत किशोर ने सोमवार को एक ट्वीट में लिखा था कि, 'लोकतंत्र में सार्थक भागीदार बनने और जन समर्थक नीतियों को आकार देने की खोज की 10 साल की यात्रा हो गई है। अब मैं नई शुरुआत करता हूं, यह असल काम करने, लोगों तक जाने, मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने और 'जन सुराज' की राह पर जाने का समय है। शुरुआत बिहार से।'