पेगासस जासूसी कांड पर SC की कमेटी गंभीर, जिन्हें फोन हैक होने का शक उनसे मांगी डिटेल्स

स्वतंत्र मीडिया समूहों द्वारा जारी पेगासस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 142 से अधिक लोगों को बनाया गया था पेगासस स्पाईवेयर का निशाना, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने 7 जनवरी तक मांगी डिटेल्स

Updated: Jan 02, 2022, 04:34 PM IST

पेगासस जासूसी कांड पर SC की कमेटी गंभीर, जिन्हें फोन हैक होने का शक उनसे मांगी डिटेल्स

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी कांड को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई टेक्निकल कमेटी बेहद गंभीरता से ले रही है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने ऐसे लोगों से जानकारी मांगी है जिन्हें संदेह है कि उनके फोन को पेगासस स्पाईवेयर का निशाना बनाया गया था। कमेटी ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर ऐसे लोगों को 7 जनवरी तक संपर्क करने को कहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने कहा है कि वह फोन की जांच के लिए तैयार हैं। बता दें कि दुनियाभर के प्रमुख मीडिया समूहों ने साझा रूप से पेगासस रिपोर्ट तैयार किया था। इसमें पता चला है कि भारत में 142 से अधिक लोगों को इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस का निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब ने कुछ सेलफोन की फोरेंसिक जांच की जिसमें पेगासस के जासूसी की पुष्टि भी हुई।

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पेगासस निर्माता कंपनी NSO का स्पष्ट कहना है कि वह अपना मालवेयर लोकतांत्रिक सरकारों को ही देती है ताकि इसका इस्तेमाल देश अपनी सुरक्षा के लिए और आतंकियों से निपटने के लिए करे। लेकिन पेगासस रिपोर्ट में पूर्व में हुए खुलासे बताते हैं कि भारत में पेगासस का उपयोग राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेताओं, चीफ इलेक्शन कमिश्नर रहे अशोक लवासा, सुप्रीम कोर्ट के जजों, दर्जनों पत्रकारों और एक्टिविस्टों के खिलाफ हुआ। 

हाल ही में जानेमाने अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कैद भारतीय एक्टिविस्ट रोना विल्सन का फोन भी पेगासस स्पाईवेयर का शिकार था। एमनेस्टी इंटरनेशनल सिक्युरिटी लैब के फॉरेंसिक जांच में ही पता चला था कि गिरफ्तारी से पहले एक्टिविस्ट विल्सन की लगातार जासूसी की जा रही थी।

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विपक्षी दल लगातार केंद्र से इस मामले में सही जानकारी देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार इस मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से बचती रही है। भारत सरकार ने न तो अबतक इस बात को स्वीकार किया है कि देश में पेगासस का इस तरह इस्तेमाल हो रहा है और न ही इस बात से इनकार किया है कि भारत भी इजरायली कंपनी एनएसओ का क्लाइंट है।