जी भाई साहब जी: मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुकाबले नए शिवराज

MP News: मामा शिवराज सिंह चौहान के राज में लाड़लियों को बेचा जा रहा है। यह आरोप किसी ओर ने नहीं बल्कि शिवराज के ‘परिवार’ की ही एक सांसद ने लगाया है।  क्‍यों कहा जा रहा है कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अलग-थलग पड़ रहे हैं?

Updated: Sep 21, 2022, 09:47 PM IST

जी भाई साहब जी: मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुकाबले नए शिवराज
ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया साभार एबीपी न्‍यूज

राजनीतिक विश्‍लेषक बीजपी में मुख्‍यमंत्री‍ शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व को निष्‍कंटक मानते हैं। पार्टी में कोई नेता नहीं है जो उनकी सक्रियता, राजनीतिक कौशल और जनप्रियता का मुकाबला कर सके। मगर अब बीजेपी में एक नया ‘शिवराज’ से होता दिखाई दे रहा है। खासबात यह है कि यह नया ‘शिवराज’ अपनी जगह बनाने के लिए मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्ग का ही अनुसरण कर रहा है। अनुसरण ही नहीं बल्कि एक कदम आगे जा कर चौंकाने वाला व्‍यवहार कर रहा है 

हम बात कर रहे हैं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की। महाराज जीवन शैली में जीने वाले सिंधिया के कार्य व्‍यवहार को देख कर सभी अचरज कर रहे हैं। जनता के बीच रह कर भी अपनी ठसकदार अदाओं के कारण चर्चित रहे ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया इनदिनों पार्टी में जगह बनाने और कार्यकर्ताओं व जनता से घुलने मिलने के लिए शिवराज ट्रेंड को ही फॉलो कर रहे हैं।

वे हर उस रेखा को तोड़ने का काम कर रहे हैं जो सहज और सुलभ होने में बनने में बाधा बन रही है। इसके लिए वे झुकने को भी तैयार है। जैसे, क्रिकेट संगठन में अपने प्रतिद्वंद्वी रहे बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के घर जाना। दो सालों में ज्‍योति‍रादित्‍य सिंधिया दूसरी बार कैलाश विजयवर्गीय के घर गए थे। पहली बार कैलाश विजयवर्गीय उनके पहुंचने के पहले ही कोलकाता चले गए थे। ज्‍योति‍रादित्‍य सिंधिया उनके परिजनों से मेल मुलाकात कर लौट गए थे। इस बार भी ज्‍योति‍रादित्‍य सिंधिया अचानक कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंचे। कैलाश विजयवर्गीय ने उनका स्‍वागत भी किया।

इस मुलाकात से ज्‍यादा चर्चित हुआ ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का अपने बेटे महाआर्यमन सिंधिया को साथ ले जाना और कैलाश विजयवर्गीय को प्रणाम करवा कर उनका आशीर्वाद दिलवाना। सिंधिया परिवार के किसी व्‍यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से पैर छूकर किसी का आशीर्वाद लेने के ऐसे दृश्‍य कम ही दिखाई दिए हैं। खासतौर से तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रहते हुए वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने चरण वंदना को एक तरह से प्रतिबंधित ही किया है। 

बात केवल इतनी ही नहीं है। समरसता अभियान के तहत बीजेपी नेता समय-समय पर दलितों व आदिवासियों के घर पहुंच कर भोजन किया करते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्य सिंधिया ने भी ग्वालियर दौरे के दौरान दलितों के साथ बैठकर खाना खाया। मगर वे एक कदम और आगे बढ़ गए। आमतौर पर नेता केवल दलितों के यहां खाना ही खाते हैं। उन पर भी अकसर थाली या खाना बाहर से आने के आरोप लगते रहते हैं मगर सिंधिया ने दलित के घर खाना ही नहीं खाया बल्कि दलित के साथ एक थाली में खाना खाया। 

सिंधिया का यह रूप उन्‍हें जानने वालों के लिए भी सर्वथा अनूठा है। इसलिए इस आकलन में दम है कि वे खुद को बीजेपी में नए शिवराज के रूप में तैयार कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी इन जतन का कितना प्रतिसाद देती है, यह तो आने वाला वक्‍त ही बताएगा। 

मामा शिवराज के राज में बेची जा रही हैं बेटियां 

मामा के नाम से मशहूर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में लाड़लियों को बेचा जा रहा है। श्रमिक के रूप में, शादी के लिए बेटियों को बेचने के आरोप तो आम हैं लेकिन अब तो शराब पीने के बाद पुलिस से बचने के लिए बेटियों को बेचा जा रहा है। यह आरोप किसी ओर ने नहीं बल्कि शिवराज के ‘परिवार’ की ही एक सांसद ने लगाया है।  

शराब को लेकर पूर्व मुख्‍यमंत्री साध्‍वी उमा भारती जब तब शिवराज सिंह चौहान व बीजेपी सरकार के लिए परेशानियां खड़ी करती रहती हैं। अब भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने शराब के दुष्‍परिणाम गिनाते हुए शिवराज के सुशासन पर सवाल उठाए हैं। 

सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा है उन्‍होंने जिन दो गांवों को उन्होंने गोद लिया है। वहां के लोगों के पास आजीविका कमाने के लिए कोई साधन नहीं है। उन गांवों में लोग गरीब हैं। वे कच्ची शराब बनाते और बेचते हैं। ऐसे में पुलिस उन्हें पकड़कर ले जाती है तो वे अपनी बच्चियों को बेचकर पुलिस को पैसे देते हैं और अपने लोगों को छुड़ाते हैं।

सांसद प्रज्ञा ठाकुर का यह कहना बेहद गंभीर है। इससे कई सवाल उठते हैं। एक तो प्रदेश में बेरोजगारी इतनी है लोगों के पास काम नहीं है और देशी शराब बना कर बेच रहे हैं। दूसरा, पुलिस अवैध शराब बनाने वालों को पैसे लेकर छोड़ देती है। तीसरा, पुलिस को पैसा देने के लिए बेरोजगार ग्रामीण अपनी बेटियों को बेच रहे हैं। 

यह मध्‍यप्रदेश की शर्मनाक तस्‍वीर है जो बीजेपी सांसद ने दिखलाई है। कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि 18 साल से शिवराज सिंह की सरकार है। सीएम शिवराज सिंह चौहान 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' के बड़े बड़े दावे करते हैं जबकि उनकी पार्टी की ही सांसद राजधानी भोपाल के हालात बता रही हैं। कांग्रेस ने सांसद से ही पूछ लिया कि वे बताएं कि मामा के राज में लाड़लियों को कौन खरीद रहा है?

कांग्रेस हमलावर हुई तो गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र बचाव में आए। उन्‍होंने सांसद प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर कहा कि साध्वी जी हमारे परिवार की हैं। हमारी पार्टी की हैं। इस संबंध में उन्हें कोई भी जानकारी है तो हमें बताएं, कानून अपना काम करेगा। 

वैसे सांसद प्रज्ञा ठाकुर के बयान ने एकबार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। छवि बचाने के लिए सरकार ने सांसद से ही पूछ लिया है कोई जानकारी है तो हमें दीजिए। कांग्रेस भी तो यही पूछ रही है। फिलहाल आरोप लगा कर सांसद मौन है। 

प्रधानमंत्री मोदी की मध्‍य प्रदेश यात्रा

क्‍या अलग थलग हैं शिवराज सिंह चौहान 

पिछले कॉलम में हमने जिक्र किया था कि सत्‍ता परिवर्तन की खबरों के बीच मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्‍ली से संजीवनी लेकर लौटे हैं। और इस बात से सत्‍ता बदलने की ताक में बैठे बीजेपी नेताओं को निराशा हुई है। क्‍या यही वजह है कि विधानसभा में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विपक्ष के आरोपों के बीच अलग थलग दिखाई दिए? अपने ही उन पर हमलावर हैं।  

मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलग-थलग पड़ने का आकलन कर रहे विश्‍लेषकों की राय में भी दम है। जैसे, सिंधिया खेमे के मंत्री  लगातार सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। कामकाज की छोड़ भी दें तो पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने मुख्‍यसचिव को निरंकुश कह कर मुख्‍यमंत्री चौहान के प्रिय अफसर पर ही निशाना साधा था। अब शिव सरकार के खनिज साधन व श्रम मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का पत्र चर्चा में हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को लिखे पत्र में बृजेंद्र सिंह ने कहा है कि पन्ना के 100 से ज्यादा स्कूलों में पिछले 6 माह से मध्याह्न भोजन नहीं बंटा है। मध्याह्न  भोजन का वितरण नहीं होने से आमजनों में असंतोष है। 

खनिज मंत्री बृजेंद्र सिंह ने बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष व सांसद वीडी शर्मा के क्षेत्र में मध्‍याह्न भोजन वितरण न होने का खुलासा तब किया जब विधानसभा में सरकार पोषण आहार घोटाले पर सीएजी की रिपोर्ट के सवाल पर घिरी हुई थी। 

विधानसभा कार्यवाही पर नजर रखने वाले विश्‍लेषक उस वक्‍त चौंक गए थे जब कांग्रेस सरकार पर हमलावर थी और मुखिया अकेले जूझ रहे थे। किसी अन्‍य नेता ने उनकी आवाज में आवाज नहीं मिलाई। विपक्ष मुद्दे पर बहस की बात करता रहा मगर विभाग के मंत्री होने के दायित्‍व में मुख्‍यमंत्री चौहान ने अपना वक्‍तव्‍य दिया और इसके बाद विधानसभा सत्र ही खत्‍म हो गया। सदन की कार्यवाही में मुख्‍यमंत्री चौहान का पक्ष जरूर दर्ज हो गया मगर यह भी दर्ज हुआ कि आरोपों के बीच वे अकेले थे। 

ऐसा ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भी हुआ। कूनो अभ्‍यारण्‍य में चीता को पिंजरे से निकालते वक्‍त प्रधानमंत्री मोदी प्‍लेटफार्म पर अकेले ही थे। चीता बाहर निकल आए उसके बाद मुख्‍यमंत्री चौहान प्‍लेटफार्म पर आए। अन्‍यथा सारे फोटो में पीएम मोदी अकेले नजर आए। शिवराज उनसे अलग खड़े थे। कराहल में पौधरोपण के दौरान भी प्रदेश अध्‍यक्ष वीडी शर्मा प्रधानमंत्री मोदी के निकट रहे, सीएम पीछे थे। पूरी यात्रा में शिवराज सिंह चौहान पीएम मोदी के पीछे नजर आते और ओझल होते रहे। ऐसा ही राजनीति में भी हो रहा है। प्रादेशिक नेताओं की शिवराज सिंह चौहान की दूरी दिखाई दे ही जाती है।    

... और कमलनाथ ने कर लिया डैमेज कंट्रोल 

आदिवासी छात्रों के साथ झाबुआ के एसपी द्वारा अपशब्‍दों के प्रयोग पर कांग्रेस बीजेपी सरकार को घेर ही रही थी कि कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी को मुद्दा मिल गया। मुद्दे को बीजेपी ने तुरंत लपका और कमलनाथ के बंगले का घेराव करने की घोषणा कर दी। बीजेपी की मंशा को भांपते हुए कमलनाथ ने सधे हुए राजनीतिज्ञ की तरह एक निर्णय लिया और बीजेपी के हाथ बड़ा मुद्दा जाने से बचा लिया। 

हुआ यूं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के तेज तर्रार अध्यक्ष केके मिश्रा का एक वीडियो वायरल हुआ। पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान रिकार्ड हुए इस वीडियो में केके मिश्रा  ब्राह्मण समाज को अपशब्‍द देते नजर आए। झाबुआ में ब्राह्मणों के साथ भी अन्‍याय हुआ पूछे जाने पर मिश्रा कहते सुनाई दिए कि ब्राह्मण भी तो (गाली) हैं, उसकी चमचागीरी करते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद केके मिश्रा भले ही अपनी बात पर कायम रहने का बयान देते रहे मगर बीजेपी को तो मौका मिल ही गया था। भोपाल के बीजेपी जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी ने इस मामले पर प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष कमलनाथ के बंगले का घेराव करने तथा ब्राह्मणों के अपमान पर कार्रवाई न होने हुई तो राहुल गांधी की यात्रा का विरोध करने की धमकी तक दे डाली। 

बात कमलनाथ तक पहुंची तो उन्‍होंने बीजेपी प्रतिनिधि मंडल से मिलने का फैसला किया। जिलाध्‍यक्ष सुमित पचौरी के नेतृत्‍व में प्रतिनिधि मंडल ने कमलनाथ से बंगले पर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सुमित पचौरी ने कहा कि हमने केके मिश्रा पर कार्रवाई की मांग की है। कमलनाथ ने इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

खबर है कि बुधवार को केके मिश्रा को तलब किया गया है। उन पर जो भी कार्रवाई हो या न हो, फिलहाल तो कमलनाथ ने बयान से उपजी नाराजगी का राजनीतिक लाभ उठाने से बीजेपी को रोक दिया।