Narmada Jayanti 2021: त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवि नर्मदे

मां सरस्वती तीन दिन में, यमुना एक सप्ताह में और गंगा तत्काल पवित्र करती हैं, लेकिन नर्मदा तो दर्शन मात्र से पवित्र कर देती हैं।

Updated: Feb 19, 2021, 12:52 AM IST

Narmada Jayanti 2021: त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवि नर्मदे
Photo courtesy: Indian vedio

आज नर्मदा जयंती है। हम सब अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जो परम पावनी मां नर्मदा का प्रत्यक्ष दर्शन कर रहे हैं। भगवती नर्मदा के लिए पुराणों में एक शब्द आया है। 

नर्मदा सरितां वरा

अर्थात् सरिताओं में नर्मदा सर्व श्रेष्ठ हैं। माता नर्मदा असंख्य विशेषताओं से सम्पन्न हैं। भारत में बहुत सी पवित्र नदियां हैं, लेकिन पुराण तो केवल नर्मदा जी के नाम पर ही (नर्मदा पुराण) है। जिसमें माता नर्मदा के परम पावन चरित्र का वर्णन है, और उनके उस दिव्यातिदिव्य चरित्र में अवगाहन करके असंख्य प्राणी भगद्धाम के अधिकारी होते हैं।

ये ध्यायंति महादेवीं, नर्मदां पापहारिणीं।

अघानि तेषां नश्यन्ति, तम: सूर्योदये यथा।।

जो लोग पापों का हरण करने वाली नर्मदा महादेवी का ध्यान करते हैं, उनके पाप वैसे ही नष्ट हो जाते हैं, जैसे सूर्योदय होने पर अंधकार नष्ट हो जाता है। यहां एक और बात उल्लेखनीय है कि भारत में किसी भी नदी की परिक्रमा नहीं होती, केवल नर्मदा की ही परिक्रमा होती है। वे लोग सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने नियम पूर्वक मां नर्मदा की परिक्रमा की है। कथा आती है कि मार्कण्डेय ऋषि निरंतर नर्मदा की परिक्रमा करते रहते हैं, लेकिन स्नान नहीं करते। एकबार भगवती नर्मदा ने ऋषिवर से पूछा कि महर्षि!

मज्जन्ति मुनयः सर्वे, त्वमेक: किं न मज्जसि??

मार्कण्डेय! सभी ऋषि महात्मा गण मुझमें स्नान करते हैं। तुम अकेले स्नान क्यूं नहीं करते?? तब मार्कण्डेय जी बोले-

रेवे त्वद्दर्शनान्मुक्ति: न जाने स्नानजं फलम्

हे रेवा! जब तुम्हारे दर्शन से ही मुक्ति हो जाती है, तो स्नान का न जाने क्या फल होगा। इसीलिए परम पूज्य गुरुदेव ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर पूज्य पाद श्री शंकराचार्य जी महाराज कहते हैं-

त्रिभि: सारस्वतं तोयं, सप्ताहेन च यामुनम्।

सद्यः पुनाति गांगेयं, दर्शनादेव नार्मदम्।।

अर्थात् सरस्वती तीन दिन में, यमुना एक सप्ताह में, गंगा तत्काल पवित्र करती हैं लेकिन नर्मदा तो दर्शन मात्र से पवित्र कर देती हैं।

सन्ति तीर्थानि दिव्यानि, दक्षिणोत्तर कूलयो:।

नर्मदा कथिता दिव्या, हृद्या कस्य न रोचते।।

मां नर्मदा के उत्तर दक्षिण दोनों तटों पर अनेक दिव्य तीर्थ हैं। ऐसी दिव्य नर्मदा मैय्या सभी के हृदय को अच्छी लगती हैं, और सभी का मंगल करती हैं।

        नर्मदे हर