कीजिए अनोखे मंदिर के दर्शन जहां माखनचोर के पास है सैकड़ों एकड़ जमीन, 98 साल से भगवान कृष्ण हैं गांव के जमींदार

जबलपुर के पटोरी गांव में 500 एकड़ जमीन के बीचों-बीच बना है मुरली मनोहर का दिव्य मंदिर, राधा-कृष्ण की होती है नियमित पूजा, राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट करता है संचालन, कान्हा के नाम दर्ज है सारी जमीन

Updated: Aug 30, 2021, 04:49 PM IST

कीजिए अनोखे मंदिर के दर्शन जहां माखनचोर के पास है सैकड़ों एकड़ जमीन, 98 साल से भगवान कृष्ण हैं  गांव के जमींदार
Photo Courtesy: Bhaskar

कहा जाता है सकल भूमि गोपाल की। याने संसार में जो भी कुछ है वह द्वारकाधीश भगवान  श्रीकृष्ण का है, उन्हीने संसार को बनाया है, वे ही उसके कर्ता-धर्ता हैं। दुनिया में एक से बढ़कर एक भक्त संसार में हैं जो अपनी प्रिय वस्तुएं अपने आराध्य श्रीकृष्ण को अर्पित कर देते हैं। इन्ही में से एक हैं जबलपुर की द्रोपदी बाई मिश्राइन। इन्होंने तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा की तर्ज पर करीब 98 साल पहले अपनी बेशकीमती अरबों की जमीन भगवान श्रीकृष्ण के नाम कर दी थी। करीब 10 दशक से भगवान श्रीकृष्ण यहां के जमींदार हैं। भगवान कृष्ण का यह मंदिर जबलपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर स्थित पटोरी गांव में बना है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण राधारानी के साथ विराजमान हैं। यह गांव जबलपुर की मझौली तहसील में स्थित है, द्रोपदी बाई ने 1923 में राधा-कृष्ण का सुंदर मंदिर बनवाया था।                                 

साथ में मंदिर के संचालन के लिए बजट का इंतजाम करने के लिए 500 एकड़ जमीन दी थी। जिससे मंदिर का सुचारू संचालन किया जा सके। द्रोपदी मिश्राइन ने भगवान श्रीकृष्ण को गांव का जमींदार घोषित किया था। तभी से कृष्ण भगवान ही पटोरी गांव के जमींदार हैं। 500 एकड़ जमीन का संचालन राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के नाम से किया जाता है। द्रोपदी बाई ने पास के ही मुरैठ गांव में राम मंदिर का निर्माण भी करवाया है। भगवान राम और कृष्ण के मंदिरों के ट्रस्टों का संचालन एक साथ होता है।

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राधा-कृष्ण के इस मंदिर में गांव वालों की असीम श्रद्धा है, लोग दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं। माना जाता है कि मुरलीधर से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। घर में कोई शुभ कार्य होने पर ग्रामीण पहला न्यौता श्रीकृष्ण जी को ही देते हैं। बिना राधाकृष्ण के दर्शन के घर से बारात नहीं निकलती औऱ ना ही वधुप्रवेश होता है। यहां मंदिर प्रांगण में लोग अपने बच्चों का मुंडन, यज्ञोपवीत जैसे संस्कार करवाते हैं। वहीं इन मौकों पर भजन, कीर्तन, भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होने के लिए आते हैं।

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हर साल की तरह इस साल भी गांव में जन्माष्टमी की धूम हैं। कान्हा के लिए मंदिर में झूला लगाया गया है। रात 12 बजे तक भजन-कीर्तन का आय़ोजन कर प्रसाद वितरण किया जाता है। वहीं जन्म के छठे दिन भगवान की छठी का आयोजन किया जाता है। छठी के मौके पर जापे के दौरान बनने वाले लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।