विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों में ग्रेजुएशन करने में अमेरिका, रुस, फ्रांस और यूके से आगे निकलीं भारतीय महिलाएं

विकसित देशों से आगे निकल कर भारत में 43% महिलाएं STEM विषयों में ग्रेजुएट, भारतीय महिलाओं से पिछड़े पुरुष 3 सालों में भारत में 12.9 लाख से घटकर 11.9 लाख पुरुष हुए तकनीकी विषयों में स्नातक, जबकि महिला ग्रेजुएट्स की संख्या 10 लाख से बढ़कर 10.6 लाख हुई

Updated: Jul 22, 2021, 12:47 PM IST

विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों में ग्रेजुएशन करने में अमेरिका, रुस, फ्रांस और यूके से आगे निकलीं भारतीय महिलाएं
Photo Courtesy: The Print

दिल्ली। भारत की महिलाएं कितनी तेजी से विश्व की महिलाओं से आगे निकल रही हैं, इसका ताजा उदाहरण हाल में संसद में पेश किए गए एक जवाब में हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा है कि भारत की महिलाएं विकसित देशों की अपेक्षा विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में अमेरिका, यूके, जर्मनी और फ्रांस से काफी आगे हैं। भारत में 43 प्रतिशत महिलाएं STEM में ग्रेजुएट हैं, जबकि विश्व के विकसित देशों में इनका प्रतिशत कम है। अमेरिका में 34%, यूके 38%, जर्मनी 27% और फ्रांस 32 प्रतिशत महिलाएं इन विषयों में ग्रेजुएट हैं।

बीते तीन साल में भारत में विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के ग्रेजुएट्स की संख्या में पुरुषों संख्या कम हुई है। वहीं महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पिछले तीन वर्षों से आंकड़ों के अनुसार हायर एजुकेशन पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण ((AISHE) में पाया गया है कि भारत में इन विषयों में ग्रेजुएट पुरुषों की संख्या 2017-18 में लगभग 12.9 लाख से घटकर 2019-20 में लगभग 11.9 लाख हो गई है। वहीं इस दौरान 10 लाख से बढ़कर करीब 10.6 लाख महिलाओं ने इन विषयों में स्नातक की ड्रिग्री ली।  

दरअसल भारत में विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए  चलाई जा रही योजनाओं के बारे में सवाल किया गया था। जिसके बारे में संसद को दिए जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया है कि महिलाओं में STEM को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से नॉलेज इन्वॉल्वमेंट रिसर्च एडवांसमेंट थ्रू पोषण (किरण) जैसी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। वहीं कामकाजी महिला वैज्ञानिकों के पुनर्वास के लिए मोबिलिटी कार्यक्रम शुरू किया गया है। साथ ही भारतीय महिला वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और टैक्नोलॉजिस्ट्स को अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अनुसंधान करने का मौका देने के लिए STEMM के तहत महिलाओं के लिए भारत-अमेरिका फैलोशिप (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और मेडेसिन) शुरू किया गया था।

इस योजना के तहत भारतीय महिला वैज्ञानिक, इंजीनियर और टैक्नोलॉजिस्ट्स को 3-6 महीने के लिए अमेरिका में प्रमुख संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अनुसंधान करने का मौका दिया जाता है।

देश में विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाए संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से महिलाओं की संख्या इन विषयों में बढ़ी है। महिलाएं भारत के साथ-साथ विदेशों में जा कर विश्व की टॉप यूनिवर्सिटीज में रिसर्च कर रही हैं।  

 STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्कूलों से ही छात्राओं को प्रोत्साहन दिया जाता है। जिसके तहत IX से XII की मेधावी छात्राओं के लिए इनोवेशन और विमन यूनिवर्सिटीज (क्यूरी) में उत्कृष्टता और विज्ञान ज्योति स्कीन के माध्यम से विश्वविद्यालय अनुसंधान में महिलाएं आगे आई हैं।

यही वजह है कि भारत अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों से आगे निकल गया है। यहां तृतीयक स्तर पर विज्ञान प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और गणित में महिलाओं का प्रतिशत बढ़ा है। भारतीय  स्नातक महिलाओं की संख्या अधिक हुई है।