प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर कांग्रेस ने वित्त मंत्री को दिखाया आइना

वित्त मंत्री ने कहा है कि मोदी सरकार के 8 साल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 65 फीसदी से अधिक हुआ, कांग्रेस प्रवक्ता गुरुदीप सप्पल ने आंकड़े पेश करके बताया कि डॉ मनमोहन सिंह के 10 वर्ष के कार्यकाल में एफडीआई में 1130 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी 

Updated: Mar 31, 2022, 11:56 AM IST

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर कांग्रेस ने वित्त मंत्री को दिखाया आइना

नई दिल्ली। देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आइना दिखाते हुए डॉ मनमोहन सिंह के 10 वर्ष के कार्यकाल के आकंड़े पेश किये हैं। कांग्रेस प्रवक्ता गुरुदीप सप्पल ने आंकड़े देकर बताया कि डॉ मनमोहन सिंह के 10 वर्ष के कार्यकाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 1130 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। 

दरअसल वित्त मंत्री ने संसद में मंगलवार को वित्त विधेयक 2022 और विनियोग विधेयक 2022 पर जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश में 500.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है, जो कि यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल के मुकाबले 65 फीसदी ज्यादा है। वित्त मंत्री ने अंकटाड की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 5 देशों में बना हुआ है। ये आंकड़े पेश करते हुए वित्त मंत्री ने ये दावा भी किया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विदेशी निवेशक मौजूदा सरकार की आर्थिक नीतियों पर भरोसा करते हैं। 

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वित्त मंत्री के इसी बयान का जवाब देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरदीप सिंह सप्पल ने डॉ मनमोहन सिंह के 10 वर्ष के कार्यकाल के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री का ये दावा सही है कि मोदी सरकार के 8 साल के कार्यकाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 65 फीसदी की वृद्धि हुई है, पर वो ये बताना भूल गईं कि डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के दस सालों में ये वृद्धि 11.3 गुना यानी 1130 फीसदी हुई थी। कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने इस दावे के समर्थन में वर्ष 1998 से लेकर वर्ष 2014 तक देश में हर साल आये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पूरा ब्यौरा भी पेश किया। इन आंकड़ों के जरिये उन्होंने वाजपेयी सरकार के 6 साल और डॉ मनमोहन सिंह सरकार के पहले 6 साल की तुलना करके बताया कि यूपीए सरकार के दौरान एफडीआई में वृद्धि वाजपेयी सरकार की तुलना में 610 फीसदी अधिक थी। जबकि मौजूदा सरकार एफडीआई में 65 फीसदी की वृद्धि पर ही खुश हो रही है।