दिलीप साहब को सिर्फ थोड़ी कमज़ोरी है, अफवाहों पर सायरा बानो की सफ़ाई

सायरा बानो ने दिलीप कुमार के बीमार होने की खबरों को किया खारिज, 11 दिसंबर को 98 साल के हो जाएंगे देश के महान अभिनेता

Updated: Dec 08, 2020, 01:24 PM IST

दिलीप साहब को सिर्फ थोड़ी कमज़ोरी है, अफवाहों पर सायरा बानो की सफ़ाई
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देश के महानतम अभिनेताओं में शामिल दिलीप कुमार की सेहत ठीक है। उन्हें सिर्फ़ थोड़ी कमज़ोरी है। दिलीप साहब की सेहत खराब होने की अफवाहों के बीच यह जानकारी उनकी पत्नी और मशहूर अभिनेत्री सायरा बानो ने दी है। सायरा बानो ने बताया कि दिलीप कुमार घर पर ही हैं, जहां उनकी देखभाल उन्हीं डॉक्‍टरों की सलाह के मुताबिक की जा रही है जो पिछले कई दशकों से उनकी सेहत का ख्याल रख रहे हैं। दिलीप साहब इसी 11 दिसंबर को 98 साल के होने वाले हैं। लेकिन इस साल कोरोना महामारी और दिलीप साहब के दो छोटे भाइयों के निधन की वजह से बर्थ डे मनाए जाने की उम्मीद बेहद कम है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दिलीप कुमार की तबीयत नासाज होने की खबरें चल रही हैं, उन खबरों के अनुसार सायरा बानो ने फैंस से उनकी सलामती की दुआ करने की अपील की थी। लेकिन सायरा बानो ने सेहत बिगड़ने की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि दिलीप साहब ठीक हैं, उनकी इम्युनिटी लो होने की खबरें निराधार हैं, उन बातों में कोई तथ्य नहीं है। दिलीप साहब कुछ कमजोरी जरूर महसूस कर रहे हैं लेकिन उनकी ठीक है और वे घर पर ही हैं।"  सायरा बानो ने बताया कि उन्हें रेग्युलर चेकअप के मकसद से एक-दो दिन के लिए हॉस्पिटल में एडमिट किया जा सकता है। सायरा बानो का कहना है कि उनकी उम्र के मद्देनजर पहले से ही हर तरह का एहतियात बरता जा रहा है। जिन डॉक्टरों की टीम दिलीप कुमार की सेहत पर नज़र रखती है, उनमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और मेडिसिन के एक्सपर्ट शामिल हैं।

 

देविका रानी के कहने पर दिलीप कुमार रखा नाम

दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसम्बर, 1922 को पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुआ था। उनका असली नाम मोहम्मद युसूफ़ ख़ान है। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई आकर बस गया था। पिता के व्यापार में घाटा होने की वजह से उन्हें पुणे की एक कैंटीन में काम करना पड़ा था। जहां देविका रानी से उनकी मुलाकात हुई। देविका रानी ही दिलीप कुमार को फिल्मों में ले आईं। देविका रानी ने ही उनका नाम युसूफ़ ख़ान से बदलकर दिलीप कुमार रखा था ।

देवदास फिल्म से मिली ट्रैजडी किंग की पहचान  

1944 में दिलीप कुमार ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म ज्वार भाटा थी, जो बहुत कामयाब नहीं रही, लेकिन दिलीप कुमार को प्रतिमा, जुगनू, अनोखा प्यार, नौका डूबी जैसी कुछ और फिल्मों में काम मिल गया। करीब 4 साल तक संघर्ष करने के बाद 1948 में फिल्म मेला की सफलता ने दिलीप कुमार को पहचान दिलाई। 1949 में अंदाज़ फिल्म में दिलीप कुमार को राजकपूर के साथ काम करने का मौका मिला। अंदाज सुपरहिट साबित हुई और दिलीप कुमार ने उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1951 में दीदार और 1955 में देवदास में निभाए किरदारों ने दिलीप कुमार को ट्रैजडी किंग के रूप में लोकप्रिय कर दिया।

मुगल-ए-आज़म के बेमिसाल सलीम

1960 में फिल्म मुगले-ए-आजम में दिलीप कुमार ने शहजादे सलीम का किरदार निभाया, जिसमें उनकी बेमिसाल अदाकारी और संवाद अदायगी ने लोगों को उनका मुरीद बना लिया। फिल्म मुगल-ए-आजम अपने समय की सबसे महंगी फिल्म मानी जाती है, जो कि 5 अगस्त 1960 को डेढ़ सौ थियेटरों में एक साथ रिलीज हुई थी। सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ गोपी, सगीना, बैराग, दुनिया जैसी सुपरहिट फिल्मो में काम किया।  

दिलीप कुमार एक ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। राम और श्याम में दिलीप कुमार में वे डबल रोल में नजर आए थे। क्रांति, विधाता, दुनिया, कर्मा, इज़्ज़तदार और सौदागर में उन्होंने अपने अभिनय से लोगों को प्रभावित किया। 1998 में रिलीज हुई फिल्म क़िला उनकी अंतिम फिल्म है। दिलीप कुमार की आत्मकथा का नाम 'द सबस्टेंस एंड द शैडो' है। अपनी बायोग्राफी में दिलीप कुमार ने बताया है कि सायरा बानों को उन्होंने 'झुक गया आसमान' की शूटिंग के दौरान प्रपोज किया था।

दिलीप कुमार की गिनती भारतीय सिनेमा के सर्वकालिक महानतम अभिनेताओं में होती है। फिल्म 'आदमी' में उनका अभिनय देखकर हास्य अभिनेता ओम प्रकाश ने कहा था कि यकीन नहीं होता अभिनय का हुनर इतनी बुंलदियों तक भी जा सकता है। 

भारत और पाकिस्तान में मिला सम्मान

दिलीप कुमार ने अपने करियर में करीब 60 फिल्मों में काम किया है। उन्हें बेहतरीन एक्टिंग के लिए आठ बार फिल्म फेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। दिलीप साहब ने भले ही ज्यादा फिल्में नहीं की हों, लेकिन उनका निभाया हर किरदार यादगार अभिनय की मिसाल है। न जाने कितने अभिनेताओं ने उन्हें आदर्श और प्रेरणास्रोत मानकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा होगा। दिलीप कुमार को 1994 में भारतीय फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पाकिस्तान ने भी अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया है।