कोरोना काल में किसानों पर आई एक और आफत, इफको ने बढ़ाए खाद के दाम, DAP की कीमतों में डेढ़ गुना की बढ़ोतरी

पहले DAP की प्रति 50 किलो की बोरी की कीमत 1200 रुपए थी, अब इसे इफको ने 1900 रुपए कर दिया है, NPK 10:26:26 की प्रति बोरी कीमत 1175 रुपए थी, अब यह 600 रुपए बढ़कर 1775 रुपए हो गई है

Updated: Apr 08, 2021, 04:19 PM IST

कोरोना काल में किसानों पर आई एक और आफत, इफको ने बढ़ाए खाद के दाम, DAP की कीमतों में डेढ़ गुना की बढ़ोतरी
Photo Courtesy: Amar Ujala

नई दिल्ली। कोरोना संकट काल के बीच किसानों के सामने एक नई आफत आ गई है। इफको यानी इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स कॉरपोरेटिव लिमिटेड ने खाद के दाम बढ़ा दिए हैं। कोरोना काल में पहले से ही आर्थिक तंगहाली झेल रहे किसानों को खाद की बढ़ी कीमतों ने परेशानी में डाल दिया है। 

DAP की प्रति 50 किलो की बोरी की कीमत इफको ने 1900 रुपए कर दी है। पहले DAP किसानों को 1200 रुपए में उपलब्ध हो रहा था। DAP के साथ साथ NPK 10:26:26, NPK 12:32:16, NPK 15:15:15, NP 20:20:0:13 की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है। 

NPK 10:26:26 पहले किसानों को प्रति 50 किलो बोरी की दर पर 1175 रुपए में उपलब्ध हो रहा था। लेकिन अब किसान इसे 600 रुपए अधिक यानी 1775 रुपए में प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही NPK 12:32:16 725 रुपए अधिक की कीमत पर उपलब्ध होगा। पहले किसान इस खाद को 1175 रुपए में खरीदते थे लेकिन अब इसकी कीमत 1800 रुपए कर दी गई है। वहीं NPK 20:20:0:13 की बोरी किसानों को 1350 रुपए की कीमत पर उपलब्ध होगी। जबकि इससे पहले यह किसानों को 925 रुपए में मिला करती थी। 

एक तरफ केंद्र सरकार कृषि कानूनों के ज़रिए  किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है। लेकिन दूसरी तरफ केंद्र के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (chemicals and ferilizers ministry) के अंतर्गत आने वाले IFFCO ने खाद के दामों में लगभग डेढ़ गुना की वृद्धि की है। साफ शब्दों में खाद के बढ़े दामों की वजह से किसानों की लागत में डेढ़ गुना की वृद्धि हो जाएगी। 

खाद के दाम बढ़ाकर निजीकरण के रास्ते खोल रही है सरकार ॉ: केदार सिरोही, कृषि विशेषज्ञ 

इफको द्वारा खाद के दामों में हुई वृद्धि को लेकर कृषि विशेषज्ञ केदार शंकर सिहोरी का कहना है कि इसके जरिए केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में निजीकरण का रास्ता खोल रही है। केदार सिरोही कहते हैं, एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करती है, दूसरी तरफ किसानों की फसल में लगने वाली लागत को बढ़ा रही है।

किसानों की फसल एमएसपी के नीचे बिक रही है, डीजल महंगा हो गया है, बीज के दाम बढ़ गए हैं, और अब खाद के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर सरकार ने किसानों पर एक और चोट कर दी है। केदार शंकर सिरोही कहते हैं कि सरकार के इन विनाशकारी कदमों की वजह से किसान अपनी ज़मीन बेचने पर मजबूर हो जाएंगे। कुल मिलाकर सरकार अपने इन कदमों की बदौलत कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट घरानों का दखल बढ़ाने का ही प्रयास कर रही है।