सरकार ने गन्ना की FRP में किया 5 रुपए का इज़ाफा, लोगों ने सरकार के फैसले को बताया किसानों के साथ मज़ाक

मोदी सरकार ने आज गन्ना के किसानों के लिए एफआरपी में प्रति क्विंटल पांच रुपए का इज़ाफा किया है, इसको लेकर सोशल मीडिया पर मोदी सरकार का विरोथ शुरू हो गया है, लोगों का कहना है कि गन्ना के किसानों की लागत बढ़ी है, ऐसे में सरकार को प्रति क्विंटल कम से कम 15 रुपए का इज़ाफा करना चाहिए था, लेकिन सरकार महज़ पांच रुपए की वृद्धि कर अपनी वाहवाही लूटने में लगी हुई है

Updated: Aug 25, 2021, 06:14 PM IST

सरकार ने गन्ना की FRP में किया 5 रुपए का इज़ाफा, लोगों ने सरकार के फैसले को बताया किसानों के साथ मज़ाक
Photo Courtesy : Livemint.com

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गन्ना पर एफआरपी बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई आज बैठक के दौरान गन्ना की फसल पर प्रति क्विंटल पांच रुपए तक एफआरपी बढ़ाने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद से ही सरकार से जुड़े लोग प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के फैसले की प्रशंसा करते नहीं थक रहे, लेकिन दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर लोग इसे गन्ना किसानों के साथ किया गया एक भद्दा मज़ाक करार दे रहे हैं।  

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने ट्विटर हैंडल पर अपनी सरकार के फैसले की वाहवाही करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी की अध्यक्षता में आर्थिक कार्य संबंधी मंत्रिमंडल समिति की बैठक में गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य को बढ़ाकर वर्ष 2021-22 के लिए 290 रूपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया। उन्होंंने आगे कहा कि इससे चीनी कारखानों का प्रचलन सुप्रभावी तरीके से जारी रहेगा और यह भी सुनिश्चित होगा कि देश में चीनी का उत्पादन न सिर्फ मांग बल्कि निर्यात की पूर्ति के लिए भी उपलब्ध रहेगा। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस फैसले से देशभर में लगभग 5 करोड़ गन्ना किसान लाभान्वित होंगे।इससे किसान गन्ना उत्पादकों को गन्ने की गारंटीयुक्त कीमत प्राप्त होगी तथा किसान गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। 

कृषि मंत्री के इन दावों पर सवाल खड़ा करते हुए एक सोशल मीडिया यूज़र ने कहा कि आंकड़ों का खेल समझाने के लिये किसानों को न चुनिये। सरकार ने गन्ने के मूल्य में केवल 5 रू प्रति कुन्तल की वृद्धि की है, जो कि किसानों के साथ मजाक है। पूर्व निर्धारित मूल्य 285 रू का नाम लिये बिना ट्वीट करके अपनी पीठ थपथपाने की जगह अच्छा होगा कि आप इस विषय पर मौन रहें। 

दरअसल मोदी सरकार ने पिछले शुगर ईयर में गन्ना की एफआरपी में प्रति क्विंटल दस रुपए की वृद्धि की थी। और इस बार मोदी सरकार ने एफआरपी में पांच रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। गन्ना से जुड़े किसानों की यह दलील है कि गन्ना की फसल तैयार करने में उनकी लागत में काफी इज़ाफा हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार को एफआरपी में प्रति क्विंटल कम से कम 25 से 30 रुपए की वृद्धि करनी चाहिए। अन्यथा पांच रुपए का इज़ाफा किसानों के साथ एक क्रूर मज़ाक से बढ़कर और कुछ भी नहीं है।       

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले से ही गन्ना की फसल पर एसएपी निर्धारित है। जो कि केंद्र सरकार द्वारा तय की गई एफआरपी से अधिक होती है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई पांच रूपए की एफआरपी से ज़्यादातर किसानों को लाभ पहुंचने की संभावना कम ही है। एफआरपी (Fair and Remunerative Price) और एसएपी वह कीमतें होती हैं जिसपर चीनी मिल गन्ना किसानों से उनके द्वारा तैयार किए गए गन्ने को खरीदती हैं।

कमीशन ऑफ एग्रीकल्चर एंड प्राइसेज़ हर वर्ष गन्ना की एफआरपी की सिफारिश करती हैं। जबकि स्टेट एडवाइज़री प्राइस राज्य सरकारें तय करती हैं। इस लिहाज़ से केंद्र सरकार द्वारा एफआरपी बढ़ाने से उन किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचने वाला जहां पर पहले से ही एसएपी की व्यवस्था है। तो वहीं बाकी जगहों पर किसानों के लिए एफआरपी उनकी लागत से कम है।