चीन ने बनाया सूरज से भी 10 गुना ताकतवर कृत्रिम सूर्य, 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक तापमान

चीन के वैज्ञानिकों ने बनाया नकली सूर्य, असली वाले से भी कई गुना ज्यादा गर्म, असली सूर्य से 10 गुना ज्यादा पहुंचा तापमान

Updated: Jun 03, 2021, 04:15 PM IST

चीन ने बनाया सूरज से भी 10 गुना ताकतवर कृत्रिम सूर्य, 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक तापमान
Photo Courtesy: Timesnow

तकनीक और विज्ञान की बदौलत चीन ने अब प्रकृति को भी चुनौती देना शुरू कर दिया है। चीनी वैज्ञानिकों ने अपने लैब में आर्टिफिशियल यानी कृत्रिम सूर्य विकसित कर लिया है। हैरानी की बात यह है कि चीन द्वारा बनाया गया यह नकली सूर्य असली सूरज से भी कई गुना ज्यादा ताकतवर है।

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन द्वारा निर्मित यह नकली सूरज असली सूर्य के मुकाबले 10 गुना ज्यादा गर्मी और प्रकाश देने में सक्षम है। चीनी वैज्ञानिकों के मुताबिक 10 सेकंड में इस सूर्य का तापमान 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जिसका स्पष्ट अर्थ ये है कि प्राकृतिक सूरज की तुलना में यह 10 गुना अधिक गर्म रहा। खास बात यह है कि यह तापमान करीब 100 सेकंड तक कायम भी रहा।

यह भी पढ़ें: दुनिया में वायरस फैलने से पहले चीन की लैब के शोधकर्ता हुए थे बीमार, वॉल स्ट्रीट जनरल का खुलासा

शेन्ज़ेन स्थित दक्षिणी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भौतिक विभाग के निदेशक ली मियाओ ने चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से बातचीत के दौरान कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण कामयाबी है। मियाओ ने बताया कि वैज्ञानिकों का अब अगला लक्ष्य तापमान को लंबे समय तक स्थिर रखना है। अब उसी दिशा में आगे काम किया जाएगा।

न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक पर आधारित

इस नकली सूरज को चीन के अनहुई राज्य में स्थित एक रिएक्टर में बनाया गया है। इसका निर्माण न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक पर आधारित है। सामान्य तौर पर इस तकनीक का इस्तेमाल हाइड्रोजन बम बनाने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि इसमें इतनी गर्मी है कि एक ताकतवर हाइड्रोजन बम पूरी धरती को खत्म कर सकता है।

यह भी पढ़ें: मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण पर आज आएगा फैसला, पत्नी ने मारपीट पर उठाए सवाल

हाइड्रोजन बम में गर्म प्लाज्मा को फ्यूज करने के स्ट्रांग मैगनेटिक फील्ड का निर्माण किया जाता है। चीन के अलावा फ्रांस में भी न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक पर काम किया जा रहा है, फ्रांस के वैज्ञानिकों के मुताबिक उनका यह प्रोजेक्ट साल 2025 तक पूरा होगा। इसके अलावा कोरिया भी कृत्रिम सूर्य बनाने में कामयाब हुआ है।