फ्रांस ने अंतरिक्ष में शुरू किया युद्ध अभ्यास, उपग्रहों की रक्षा करना है मकसद

दुनिया में तीसरी अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की राह पर फ्रांस, अंतरिक्ष में दबदबा कायम करने की होड़ में पीछे नहीं रहना चाहता, अमेरिका और जर्मनी भी ले रहे हैं युद्ध अभ्यास में हिस्सा

Updated: Mar 11, 2021, 05:46 AM IST

फ्रांस ने अंतरिक्ष में शुरू किया युद्ध अभ्यास, उपग्रहों की रक्षा करना है मकसद
Photo Courtesy: Amar Ujala

पेरिस। फ्रांस ने अंतरिक्ष में सैन्य युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। अंतरिक्ष में फ्रांस का यह पहला युद्धाभ्यास है। फ्रांस के साथ युद्धाभ्यास में अमेरिका और जर्मनी भी हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य मकसद अपने उपग्रहों और अन्य उपकरणों की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष कमान की क्षमता का आकलन करना है। 

दुनिया में तीसरी अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की राह पर बढ़ रहा फ्रांस अंतरिक्ष में अपना दबदबा कायम करने की होड़ में पीछे रहना नहीं चाहता है। फ्रांस के नए अंतरिक्ष कमान प्रमुख माइकल फ्रीडलिंग के मुताबिक, यह युद्धाभ्यास देश की प्रणालियों पर दबाव झेलने की क्षमता का परीक्षण करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, यह फ्रांसीसी सेना का पहला और यूरोप में भी अपनी तरह का पहला अभ्यास है।

जानकारी के मुताबिक इस अभ्यास के दौरान सेना एक संभावित खतरनाक स्पेस ऑब्जेक्ट का निरीक्षण करेगी साथ ही दुनिया के अन्य देशों से अपने उपग्रहों के खतरे का आकलन करेगी। अमेरिकी स्पेस फोर्स और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी भी फ्रांसीसी अंतरिक्ष अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह अंतरिक्ष युद्धाभ्यास शुक्रवार को पूरा हो जाएगा।

फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली का कहना है कि हमारे सहयोगी और प्रतिद्वंद्वी अंतरिक्ष का सैन्यीकरण कर रहे हैं, हम भी पीछे नहीं रह सकते। फ्रांस ने एंटी-सैटेलाइट लेजर हथियारों को विकसित करने के साथ-साथ अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं में सुधार करने की योजना भी बनाई है। माना जा रहा है कि भविष्य में अंतरिक्ष भी महाशक्तियों के बीच टकराव का अखाड़ा बन सकता है और फ्रांस इसमें पीछे रहना नहीं चाहता है।

फ्रांसीसी अंतरिक्ष कमान का गठन साल 2019 में किया गया था। इसमें साल 2025 तक 500 स्पेस फाइटर्स को जोड़ने का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि अगले छह वर्षों में अंतरिक्ष सैन्य कार्यक्रम में निवेश पांच अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्तमान समय में अमेरिका व चीन इस पर सर्वाधिक खर्च करने वाले देश हैं।