नेपाल में सियासी उथल-पुथल तेज़, अपनी ही पार्टी से निकाले गए प्रधानमंत्री केपी ओली

पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने ओली को प्राथमिक सदस्यता से किया निष्कासित, अपने फैसलों पर नहीं दे पाए स्पष्टीकरण, संविधान को ताक पर रख संसद भंग करने का आरोप

Updated: Jan 25, 2021, 08:23 AM IST

नेपाल में सियासी उथल-पुथल तेज़, अपनी ही पार्टी से निकाले गए प्रधानमंत्री केपी ओली
Photo Courtesy: WION

काठमांडू। नेपाल में चल रहे राजनीतिक उथलपुथल के बीच देश के कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनकी ही पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने केपी ओली को पार्टी के प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने पीएम ओली के खिलाफ यह कदम अपने फैसले पर स्पष्टीकरण नहीं दे पाने के बाद उठाया है।

प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने इस बात की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया, 'आज हुई केंद्रीय समिति की बैठक में केपी शर्मा ओली को पार्टी से हटाने का फैसला किया गया। वो अब नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के साधारण सदस्य भी नहीं हैं। दरअसल पार्टी ने ओली से पत्र लिख कर पूछा था कि असंवैधानिक फैसले लेने पर उन्हें पार्टी से क्यों नहीं निकाला जाना चाहिए? लेकिन ओली न तो कमेटी के सामने पेश हुए और न ही उन्होंने इसका कोई जवाब दिया। नतीजतन उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।

इस मामले में पार्टी के प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा, ‘हमने लंबे समय तक इंतजार किया। लेकिन ओली की ओर से कोई जवाब नहीं आया। हमारा वर्तमान फैसला पार्टी की केंद्रीय समिति के अधिकारों के अनुरूप लिया गया है।' इससे पहले प्रचंड ने शुक्रवार को एक बड़ी सरकार विरोधी रैली का नेतृत्व किया और कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद को अवैध तरीके से भंग किए जाने से देश में मुश्किल से हासिल की गई संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य प्रणाली को गंभीर खतरा पैदा हुआ है।

गौरतलब है कि पीएम ओली ने पार्टी के भीतर चल रहे गतिरोध के बाद बीते 20 दिसंबर को नेपाली संसद भंग करने का निर्णय लिया था। ओली के इस फैसले को राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने मंजूरी दे दी थी। ओली के इस कदम को लेकर लेकर पार्टी में काफी नाराजगी थी, जिसके बाद से ही उनके पार्टी से निकाले जाने के कयास लगाए जा रहे थे। ओली के विरोधी गुट का आरोप है कि उन्होंने संविधान को ताक पर रखकर यह फैसला लिया। माना जा रहा है की नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी अब फिर से दो टुकड़ों में बंट जाएगी।