भारतीयों के लिए राहत की खबर, H-1B वीजा पर ट्रम्प के आदेश को अमेरिकी कोर्ट ने किया खारिज

अमेरिकी प्रांत कैलिफोर्निया की अदालत ने H-1B वीजा कम करने के फैसले को बताया गैरकानूनी, सरकार के आदेश को किया रद्द

Updated: Dec 02, 2020, 09:33 PM IST

भारतीयों के लिए राहत की खबर, H-1B वीजा पर ट्रम्प के आदेश को अमेरिकी कोर्ट ने किया खारिज
Photo Courtesy : The Logical Indian

कैलिफोर्निया। अमेरिका की एक अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके जरिये H-1B वीजा पर दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले तकनीकी प्रोफेशनल्स की संख्या में भारी कटौती की गई थी। यह भारत के तकनीकी प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत देने वाली खबर है। अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद कुशल विदेशी कामगारों को नौकरी देने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों को भी बड़ी राहत मिली है। 

अमेरिकी प्रांत कैलिफोर्निया के जज जेफ्री व्हाइट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार ने पारदर्शिता की प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने सरकार का इस दावे को भी निराधार करार दिया है कि कोरोना महामारी में नौकरियों के जाने की वजह से यह बदलाव जरूरी था। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन कोरोना महामारी के आने से काफी पहले से ही इस नियम को लागू करने की बात कर रहा था। ऐसे में महामारी के चलते यह रोक लगाने के दावे में दम नहीं है। 

कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा की संख्या को कम करने के दो फैसलों को गैरकानूनी बताया और H-1B वीज़ा प्रोग्राम के बदले गए नियमों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने ट्रम्प पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने निजी हितों खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए इन नियमों में बदलाव किया था जो सही नहीं है। 

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भारतीय कामगारों को सबसे ज्यादा फायदा

यूएस कोर्ट के द्वारा H-1B वीजा की संख्या कम न करने के फैसले से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय प्रोफेशनल्स को होगा। गौरतलब है कि अमेरिका सरकार हर साल टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों के लिए 85 हजार H-1B वीजा जारी करती है। इन वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीयों को मिलता है। यूएस में फिलहाल करीब 6 लाख  H-1B वीजा होल्डर हैं। यह वीजा 3 साल के लिए जारी किया जाता है जिसे बाद में रिन्यू भी किया जा सकता है। H-1B वीजा पाने वालों में भारत के बाद चीन दूसरे स्थान पर है। 

एजेंडे के तहत ट्रम्प ने बदले थे नियम

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने सभी तरह के एमिग्रेशन पर अंकुश लगाने के एजेंडे के तहत H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया था। ट्रम्प प्रशासन ने विदेशी नागरिकों को भर्ती करने वाली कंपनियों पर कई तरह की शर्तें लाद दी थीं। इनमें न्यूनतम वेतन की शर्त और विशेष पेशे जैसे कई सीमाएं रख दी गयीं थी। नए नियमों को लागू करने पर करीब एक-तिहाई आवेदकों को H-1B वीजा भी नहीं मिल पाता। 

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हालांकि अब अमेरिका में सत्ता बदल चुकी है ऐसे में पूरा माहौल भी ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ जाता दिख रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन H-1B वीज़ाधारकों के जीवनसाथी के लिए वर्क वीजा परमिट को रद्द करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले को भी पलट सकते हैं। जानकारों का कहना है कि बाइडेन प्रशासन एकसाथ या धीरे-धीरे इन सुधारों को लागू करेगा। दरअसल अमेरिका की अधिकांश कंपनियां भी इन पाबंदियों को खत्म करने के हक में हैं, क्योंकि उन्हें भारत जैसे देशों से योग्य प्रोफेशनल्स की सेवाएं कम लागत पर मिल जाती हैं।