संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का 20वां दिन, कमलनाथ ने सरकार को घेरा, बोले- उनकी बात सुनी जाए

मध्य प्रदेश के 32 हजार स्वास्थ्य कर्मी पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। हड़ताल की वजह से प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं पिछले तीन हफ्ते से ठप्प है।

Updated: Jan 03, 2023, 04:34 PM IST

संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का 20वां दिन, कमलनाथ ने सरकार को घेरा, बोले- उनकी बात सुनी जाए

भोपाल। मध्य प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारीयों की हड़ताल का आज20 वां दिन है। पिछले 20 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के 32 हजार स्वास्थ्य कर्मी धरने पर बैठे हुए हैं। हड़ताल की वजह से प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं पिछले तीन हफ्ते से ठप्प है। स्वास्थ्य कर्मियों के इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को खत्म कराने संबंधी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने को लेकर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने नाराजगी जाहिर की है।

पूर्व सीएम कमलनाथ ने शिवराज सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की बात सुनी जाए। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, 'प्रदेश के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी 15 दिसंबर से हड़ताल पर हैं। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल पहले से ही खराब है, लेकिन सरकार ने अब तक इस हड़ताल को समाप्त कराने के लिए कोई न्याय प्रिय कदम नहीं उठाया है।'

कमलनाथ ने कोरोना महामारी की आशंका को देखते हुए सीएम शिवराज से स्वास्थ्य सुविधाओं की अव्यवस्था से बचाने की अपील की है। पूर्व सीएम ने ट्वीट किया, 'प्रदेश में बढ़ती ठंड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरोना को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के बीच यह बहुत जरूरी है कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की बात सुनी जाए और मध्य प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं की अव्यवस्था से बचाया जाए।'

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इससे पहले कांग्रेस के वरीय नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण यादव ने राजधानी भोपाल में धरना स्थल पर पहुंच कर संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों का समर्थन किया था। इस दौरान उन्होंने मृतक दो ANM को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि, 'यह वही कर्मचारी हैं जिन्होनें महामारी के दौरान अपनी जान पर खेलकर मरीजों की सेवा की और उनके जीवन को बचाया। भाजपा ने विगत 2013 के चुनाव में एवं 2018 में भी घोषणा पत्र में इनकी मांगों को पूरा करने का जिक्र किया गया था किन्तु सरकार ने अपना वादा नहीं पूरा किया। इनकी मांगे जस की तस है।'