कट रहे हैं सतपुड़ा के जंगल, सारनी नगर पालिका प्रशासन पर दुर्लभ प्रजाति के पेड़ कटवाने का आरोप

सतपुड़ा जलाशय सारनी के किनारे मौजूद जंगल में नगर पालिका सीएमओ के आदेश पर ५०० से ज़्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं, स्थानीय रहवासियों व पर्यावरणविद द्वारा विरोध किया जा रहा है परन्तु शिकायत के बाद भी न वन विभाग और न ही जिला प्रशासन कोई एक्शन ले रहा है

Updated: Jun 17, 2022, 09:28 PM IST

कट रहे हैं सतपुड़ा के जंगल, सारनी नगर पालिका प्रशासन पर दुर्लभ प्रजाति के पेड़ कटवाने का आरोप
Photo Courtesy: Twitter

बैतूल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रतिदिन एक पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं लेकिन राज्य के वन क्षेत्रों में जंगलों की कटाई लगातार चिंता बढ़ा रही है। पन्ना में हीरा की खोज के लिए तो बैतूल में बिजली के खंभे गाड़ने के लिए पेड़ों की कटाई परप्रश्न खड़े किे जा रहे हैं। सारणी जंगल काटने को स्थानीय लोगों ने गैरजरूरी बताते हुए इसमें भ्रष्टाचार की आशंका जतायी है।  

मामला सतपुड़ा जलाशय के किनारे जल आवर्धन योजना के तहत बने पंपहाउस तक बिजली पहुंचाने के वास्ते खंभे लगाने का है। जिसके लिए सैकड़ों की संख्या में स्वस्थ पेड़ों की कटाई की जा रही है। सारनी नगर पालिका द्वारा दिए गए इस आदेश में वृक्षों की कटाई को जायज़ कारण बताया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों को बिजली पहुंचाने के नाम पर सैकड़ों दुर्लभ पेड़ों की कटाई तस्करी के लिए एक रास्ता बनाने का जरिया लग रहा है। 

वन्यजीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए मुहिम चलानेवाले स्थानीय पर्यावरणविद आदिल खान ने इस सम्बन्ध में जिला कलेक्टर से लेकर वन विभाग के सभी अधिकारियों से शिकायत की है। उन्होंने स्थानीय भाजपा विधायक व लोकसभा सांसद से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। लेकिन वृक्षों की कटाई अनवरत जारी है।

आदिल खान ने सारनी नगर पालिका सीएमओ पर लगातार नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक सारनी में फर्जी रिपोर्ट के आधार पर सरकारी अधिकारी 500 वृक्षों को काटना चाहते हैं। 4 प्रजाति के वृक्षों को बीमारू घोषित करके वे 19 प्रजाति के सभी स्वस्थ्य वृक्ष काटने के लिए चिन्हित किए हैं। यानि बताई गई संख्या और प्रजाति सिर्फ कागजों के लिए है। अब तक आदिल खान की तमाम शिकायतें समाधान के बिना लंबित हैं और कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।

मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जैव विविधता बोर्ड, वनमंडल अधिकारी उत्तर बैतूल से की गयी अपनी शिकायत में आदिल ने उल्लेख किया है कि उक्त क्षेत्र में बाघ व तेंदुए का मूवमेंट बना रहता है। यह वन क्षेत्र उड़नेवाली गिलहरी, सतपुड़ा लेपर्ड, दुनिया के सबसे छोटी बिल्ली रस्टी स्पॉटेड कैट, सैकड़ों तरह के पक्षियों व सरीसृपों के रहवास के लिए प्रसिद्ध है। पेड़ों के कटने से इन वन्य प्राणियों का जीवन संकट में आ जाएगा। 

इससे पहले मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने जब अपने नए पंप हाउस का निर्माण सतपुड़ा जलाशय में किया था तो कई जगह से बिजली लाइन को भूमिगत ले जाया गया। जिससे कि पेड़ों को काटने की जरूरत ही नहीं पड़ी थी। उसी तर्ज पर नगरपालिका भी भूमिगत बिजली लाइन को पंप हाउस तक ले जा सकती है, मगर कीमती वृक्षों की कटाई से संदेह बढ़ रहा है। 

यह भी पढ़ें: अग्निपथ योजना पर अड़ी मोदी सरकार, देशभर में विरोध के बावजूद तैयारियां शुरू

दरअसल बैतूल में सतपुड़ा जलाशय के किनारे जल आवर्धन योजना के तहत 100 करोड़ रूपये की लागत से पंपहाउस का निर्माण किया जा रहा है। ताकि शहर में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा सके। इस कार्य को करने के लिए मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का एशियन डेवलपमेंट बैंक के साथ अनुबंध हुआ था। इन चिंताओं की अनदेखी कर कार्य पूरा करने की कोशिश आखिरकार मनुष्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।