भोपाल में पिछले महीने 2,500 से ज्यादा लोगों की कोरोना ने ली जान, 96 फीसदी मौतों को सरकार ने छिपाया

मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक राजधानी भोपाल में अप्रैल में 109 लोगों का कोरोना से मौत हुई, श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों से मिले डेटा के मुताबिक 2,676 लोगों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया

Updated: May 03, 2021, 05:27 PM IST

भोपाल में पिछले महीने 2,500 से ज्यादा लोगों की कोरोना ने ली जान, 96 फीसदी मौतों को सरकार ने छिपाया

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना ने मौत का तांडव मचा रखा है। गली-चौराहों में मातम पसरा हुआ है और श्मशानों-कब्रिस्तानों और अस्पतालों में बस चीख-पुकार की आवाजें हैं। हालांकि, राज्य की शिवराज सरकार डेटा मैनेजमेंट में इस कदर व्यस्त है की राजधानी भोपाल में पिछले महीने 96 फीसदी मौतों को छिपा गया। श्मशान में जल रही चिताओं ने सरकार के झूठ के पोल खोलकर रख दिया है।

मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक राजधानी भोपाल में अप्रैल के महीने में 109 लोगों की कोरोना से मौत हुई। हम समवेत ने जब राजधानी में स्थित सभी श्मशान और कब्रिस्तानों का डेटा निकाला तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए। आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल तक राजधानी में कुल 2,676 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया। यानी राज्य सरकार ने राजधानी में कोरोना से हुए हर 100 मौतों में सिर्फ 4 को मौत माना, बाकी 96 फीसदी लोग सरकार की नजर में या तो जीवित हैं, या फिर उन्हें कोरोना हुआ ही नहीं।

राज्य सरकार के मुताबिक 1 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच प्रदेशभर में कोरोना से महज 1,606 मरीजों की मौत हुई। सरकार के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए भोपाल का भदभदा विश्राम घाट ही काफी है। वास्तविक आंकड़ों के मुताबिक अकेले भदभदा विश्राम घाट में ही इस दौरान 1,651 शवों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का तहत जलाया गया। यानी, प्रदेशभर के श्मशानों और कब्रिस्तानों में हुए अंतिम संस्कारों की संख्या को जोड़कर राज्य सरकार ने जो नंबर निकाला है उससे ज्यादा मौतों की कहानियां तो अकेले भदभदा विश्राम घाट में दबी हुई हैं। 

विडंबना ये है की राज्य सरकार को ये लगता है कि मुर्दे बोलते नहीं हैं, इसलिए मौतों के वास्तविक आंकडों को दबा दिया जा सकता है, लेकिन कब्रिस्तानों में दफ्न लोग और श्मशानों में जलती चिताएं सब सच बोल दे रही है। राजधानी भोपाल में वर्तमान में तीन विश्राम घाट और एक कब्रिस्तान है जहां कोरोना मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

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आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में भदभदा विश्राम घाट में 1,651 मृतकों की अंत्येष्टि, सुभाषनगर में 727 मृतकों की अंत्येष्टि और बीते 20 अप्रैल से शुरू हुए बैरागढ़ में 80 मृतकों की अंत्येष्टि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत की गई। उधर, झदा कब्रिस्तान में 176 शवों को कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत सुपुर्दे-खाक किया गया। भोपाल में सरकारी आंकड़ों में कुल मौतों से ज्यादा शव तो अकेले झदा कब्रिस्तान में शव दफ्न किए गए। 

हैरानी की बात यह है कि भदभदा विश्राम घाट में साल 2019 अप्रैल महीने में कुल 123 शवों का ही अंतिम संस्कार किया गया था। भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2021 में कोविड और नॉन-कोविड प्रोटोकॉल का तहत जलाए गए शवों की कुल संख्या 2,009 है। यानी साल 2019 की तुलना में इस साल 16 गुना से भी ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया। 

भदभदा विश्राम घाट समिति के अध्यक्ष अरुण चौधरी ने बताया कि प्रतिदिन हुए दाह संस्कारों की संख्या पूछने सरकार की ओर से दो पुलिसकर्मी आते हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि हर दिन सरकार को भी वे वही संख्या बताते हैं जो मीडिया को बताते हैं, लेकिन सरकार कई गुना कम करके आकंड़े जारी करती है। सुभाष नगर विश्राम घाट के आंकड़ों को देखें तो अप्रैल में यहां कुल 1,389 दाह संस्कार हुए, जिनमें 727 शवों को कोरोना प्रोटोकॉल का तहत जलाया गया। अप्रैल 2019, में यहां महज 213 शवों का संस्कार किया गया था। 

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इसी प्रकार झदा कब्रिस्तान के आंकड़ों को देखें तो यहां 378 शवों को दफनाया गया जिसमें 160 शव कोरोना के नहीं थे। इनमें 176 कंफर्म कोरोना संक्रमितों के शव थे और 42 शव संदिग्ध थे। साल 2019 में यहां 51 शवों को दफनाया गया था। भोपाल के इस कब्रिस्तान की स्थिति यह है कि कब्र खोदते-खोदते लोगों के हाथ छिल गए। स्थिति यहां तक खराब हो गई कि कब्र खोदने वालों को थक-हार कर जेसीबी बुलवाना पड़ा ताकि जल्दी-जल्दी कब्रें खोदी जा सके। 

एक बात और जो चिंतित कर रही है वह ये है कि आम दिनों में हो रही मौतों से कई गुना ज्यादा मौतें बिना कोरोना वाले भी दर्ज किए जा रहे हैं। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब स्थिति इतनी बुरी हो गई है कि लोग कोरोना से घरों में अचानक मरने लगे हैं। घर-घर जाकर टेस्ट न होने की वजह से लोगों को पता भी नहीं है कि उनके अपने कोरोना की वजह से मौत के मुंह में चलें गए और गली मोहल्लों में आम दिनों की तुलना में मौत का आंकड़ा अचानक बढ़ गया है।