आम बजट में मध्य प्रदेश सरकार को क़र्ज़ का तोहफ़ा, 13 हज़ार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज़ ले सकेगी सरकार

बीते दस महीने में शिवराज सरकार ने 17 बार 17.5 हज़ार करोड़ का लिया क़र्ज़, अब आम बजट में सकल घरेलू उत्पाद के 4 फीसदी तक कर्ज़ लेने की छूट

Updated: Feb 02, 2021, 12:14 PM IST

आम बजट में मध्य प्रदेश सरकार को क़र्ज़ का तोहफ़ा, 13 हज़ार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज़ ले सकेगी सरकार
Photo Courtesy: Jagran Josh

भोपाल। पहले से ही कर्ज़ में डूबी हुई मध्यप्रदेश सरकार के लिए संसद में पेश हुए बजट में एक अहम बात निकल कर सामने आई है। शिवराज सरकार इस वित्तीय वर्ष (2021-22) में 13 हज़ार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज़ ले सकेगी। राज्य सरकार फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट एक्ट के तहत सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 4 फीसदी तक कर्ज़ ले सकेगी। जो कि लगभग 13 हज़ार करोड़ रुपए बैठता है।

दरअसल मध्यप्रदेश पर पहले ही करीबन दो लाख आठ हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ है। पिछले वर्ष मार्च के अंत में सत्ता में आई शिवराज सरकार बीते दस महीने में 17,500 करोड़ का कर्ज़ ले चुकी है। कोरोना महामारी के कारण राज्य सरकार को करीब सात हजार करोड़ का राजस्व भी कम मिला है। केंद्र से जीएसटी के तौर पर 6900 करोड़ रुपए भी कम मिला है। नवंबर महीने में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार पर यह आरोप लगाया था कि सरकार ने प्रदेश के हर नागरिक पर 34 हज़ार रुपए का कर्ज़ लाद दिया। जानकारों का मानना है कि शिवराज सरकार केंद्र से मिलने वाली इस आर्थिक सहायता का उपयोग चंबल एक्सप्रेसवे के निर्माण में कर सकती है। 

भोपाल इंदौर सहित चार शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए 150 करोड़ मिलेंगे 

इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र की ओर से शिवराज सरकार को 150 करोड़ मिलने वाले हैं। केंद्र सरकार ने देश भर में कुल 42 शहरों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राशि आवंटित करने का निर्णय किया है। प्रदेश की दस लाख से ज़्यादा की आबादी वाले ये शहर भी उसी सूची में शामिल हैं। प्रदेश के कुल 6 शहर नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किए गए थे। इनमें वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को एक्शन प्लान भी भेजा था। लिहाज़ा बड़ी आबादी के चलते इन चार शहरों को प्राथमिकता के आधार पर फंड मिलेगा।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सबसे ज़्यादा इंदौर को फंड मिलेगा। इंदौर को सबसे ज़्यादा 50.5 करोड़, इसके बाद भोपाल को 44.5 करोड़, जबलपुर को 29.5 करोड़ और ग्वालियर को 25.5 करोड़ मिलेंगे।