50 लोगों को छूट, आशीर्वाद देने आएं कैसे?

शिवराज के आदेश से खुशी महसूस हुई मगर इसके पीछे एक गंभीर पेंच है।

Publish: May-04, 2020, 07:42 PM IST

50 लोगों को छूट, आशीर्वाद देने आएं कैसे?
Photo courtesy : india today

लॉकडाउन के दौरान जनता की मुसीबतों को कम करने के नाम पर सरकारें अजीबोगरीब आदेश जारी कर रही हैं। कुछ ऐसा ही फार्मूला निकला है मध्यप्रदेश में। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 3 मई को जनता को संबोधित किया। प्रदेश की जनता के नाम उन्होंने अपना संदेश दिया। इस संदेश में उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश में शादियां हो सकेंगी और हर शादी में 50 लोग शामिल हो सकेंगे। बड़ा सवाल यह था कि यह 50 लोग कौन होंगे इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 25 लोग वधू पक्ष से 25 लोग वर पक्ष से शामिल हो सकते हैं।

Click  गैरों पे करम, अपनों पे सितम करने पर मजबूर शिवराज!

सामान्य तौर पर तो शादी के आयोजन वाले परिवारों के लिए यह आदेश किसी खुशखबरी से कम नहीं। दूर से देखने वाले को लगेगा कि अब शादियों वाली मुश्किल खत्म हो सकती है और शादियां आसानी से की जा सकती हैं। लेकिन शिवराज के आदेश के पीछे एक ऐसा पेंच है जिस को सुलझाना शायद जरूरी है। दरअसल, पूरे प्रदेश में परिवहन पर अभी भी रोक लगी है।  विशेष तौर पर ग्रीन जोन से रेड या ऑरेंज जोन या फिर रेड या ऑरेंज जोन से ग्रीन जोन में। कुल मिलाकर किसी भी एक जोन के जिले से दूसरे जिले में जाने पर पूरी तरह से पाबंदी है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर शादी में 25 लोगों को शामिल होने की परमिशन है तो यह लोग शामिल कैसे होंगे? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ज्यादातर शादियां अंतर्जनपदीय होती हैं। यानि  वर पक्ष किसी जिले का होता है और वधु पक्ष किसी दुसरे जिले का होता है। ऐसे में अगर वर पक्ष को वधु पक्ष तक पहुंचने की अनुमति ही नहीं मिलेगी या फिर लड़की के पक्ष को लड़के के पक्ष तक पहुंचने की वाहन की परमिशन ही नहीं मिलेगी तो फिर आखिर यह शादियां होंगी कैसे?

Click कब खत्म होगा इंतजार, सिर्फ घोषणा, तारीख अब भी नहीं

 कुल मिलाकर यह अजीबोगरीब निर्णय है जिसके पीछे किसी प्रकार का कोई तर्क शामिल नहीं है। कोशिश यह होनी थी कि वर पक्ष और विपक्ष दोनों को शादी का कार्ड दिखाकर किसी तरह एक जगह तक पहुंचने की अनुमति दी जाए। जिससे भले ही 50 की जगह 25 या 30 लोग भी शामिल हो तो भी उनकी शादी संपन्न हो जाए। लेकिन पूरी तरीके से बेसिर पैर का आदेश निकाला गया है जिसमें वर-वधू पक्ष दोनों शादी की तैयारियां तो करेंगे लेकिन उनको शादी के स्थल तक पहुंचने की परमिशन मिलेगी या नहीं अभी यह तय नहीं है। क्योंकि जो भी परिवहन संबंधी आदेश निकाले गए हैं वे केवल ग्रीन जोन वाले जिले की सीमा के अंदर के लिए हैं ऐसे में जो लोग बारात लेकर दूसरे किसी जिले में  में जाना चाहे  उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं बताई गई है।

Click हद है, प्रवासी मजदूरों से वसूला ट्रेन का किराया

अब देखना यह है कि किस तरीके से मध्य प्रदेश की सरकार अपने इस बेतरतीब आदेश में बदलाव करती है। वर और वधु पक्ष को एक दूसरे के किसी भी विवाह स्थल तक जाने के लिए परमिशन के क्या इंतजाम करती है? अब तक मध्य प्रदेश में 10 लोगों की मौजूदगी में शादी को परमिशन मिल रही थी  लेकिन वाहन के आने-जाने की वहीं व्यवस्था नहीं थी। इसीलिए जनपद के भीतर ही शादियां हो रही थी। लेकिन अगर जो शादियां जनपद के बाहर होनी है एक जिले से दूसरे जिले में होनी है उनके लिए किस तरह की परमिशन मिलेगी अभी यह बड़ा सवाल है।

लॉक डाउन के दौरान अब तक इसी प्रकार की शादियां देखने को मिली जिसमें वधू पक्ष ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अधिकतम 10 लोगों की मौजूदगी में शादियां की हैं लेकिन अब 50 लोगों की मौजूदगी में शादियां होनी हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का किस तरीके से ध्यान रखा जाएगा और किस तरीके से ये लोग अपनी शादी कर पाते हैं यह बड़ा सवाल है।