मध्य प्रदेश के दीनदयाल मोबाइल अस्पतालों में फर्जीवाड़े का खुलासा, सरकार ने योजना पर लगाई रोक

दीनदयाल मोबाइल अस्पतालों में दिए गए मरीजों के फ़र्ज़ी आंकड़े, जांच में सामने आई धांधली

Updated: Dec 23, 2020, 12:51 AM IST

मध्य प्रदेश के दीनदयाल मोबाइल अस्पतालों में फर्जीवाड़े का खुलासा, सरकार ने योजना पर लगाई रोक
Photo Courtesy: twitter

भोपाल। गरीबों के लिए चलाई जा रही दीनदयाल चलित अस्पताल योजना फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ गई है। सरकार इस योजना पर लाखों रुपए खर्च करती है लेकिन दूर-दराज के ग्रामीण इलाज के अभाव में दम तोड़ने को मजबूर हैं। उन्हें वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। दीनदयाल चलित अस्पताल योजना के तहत एम्बुलेंस में अस्पताल रहता है। लेकिन इसकी सच्चाई यह है कि ना तो उसमें डॉक्टर मिलते हैं और ना ही जरूरी दवाएं।

फर्जीवाड़े की हद तो तब हो गई जब फर्जी मरीजों का डाटा फीड किया गया। जब मामले की बारीकी से जांच की गई तब इस मामले की परतें खुलना शुरू हुईं। जिसके बाद मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दीनदयाल चलित अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने की घोषणा कर दी गई है। जबकि दूसरी सेवाएं बरकरार रखने का फैसला लिया गया है।

और पढ़ें: भोपाल में PDS के तहत बंटा कीड़े लगा चावल, गरीबों की सेहत से खिलवाड़ क्यों

इस बारे में नेशनल हेल्थ मिशन की MD छवि भारद्वाज ने आदेश जारी कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों धार जिले में इस योजना के तहत बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ था। जांच रिपोर्ट एनएचएम भोपाल को भेजी गई थी। दीनदयाल मोबाइल अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी जिगित्सा हेल्थ केयर कंपनी को सौंपी गई थी।

आरोप है कि मोबाइल अस्पताल में जिन मरीजों का डेटा डॉक्टर्स ने भरा था वे कभी इलाज कराने पहुंचे ही नहीं। गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में 150 मोबाइल अस्पताल चल रहे थे। एक अस्पताल में लगभग 1500 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे।

 इन मोबाइल अस्पतालों में इलाज के लिए ज़रूरी पूरी व्यवस्थाएं मौजूद रहती थी। कंपनी संचालक मोबाइल अस्पताल के नाम पर लोगों को बिना सुविधा दिए सरकार से पैसे वसूल रहे थे। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, जांचों और इलाज के लिए आवश्यक उपकरण, माइक्रोस्कोप, गांव में संदेश देने के लिए साउंड सिस्टम स्पीकर सहित अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इसमें एक एमबीबीएस डाक्टर और लैब टेक्नीशियन, एक नर्स और ड्राइवर होना जरूरी है। लेकिन अक्सर ऐसी शिकायतें मिल रही थी की वे कार्य से अनुपस्थित हैं।

 इस योजना का मुख्य लक्ष्य अस्पताल विहीन दूर दराज के इलाकों में प्रारंभिक जांच, उपचार और इलाज की सुविधा प्रदान करना है। इसके अलावा महिलाओं के लिए प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और प्राथमिक इलाज की सुविधाएं भी मुफ्त में मुहैया कराई जाती हैं।