मालेगांव ब्लास्ट केस में प्रज्ञा ठाकुर की जमानत रद्द करने की मांग, भड़काऊ भाषण देकर मुश्किलों में फंसी भोपाल सांसद

वरिष्ठ पत्रकार एलएस हरदेनिया व अन्य समाजसेवियों ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ हेट स्पीच मामले में कार्रवाई की मांग की है।

Updated: Jan 21, 2023, 01:39 PM IST

मालेगांव ब्लास्ट केस में प्रज्ञा ठाकुर की जमानत रद्द करने की मांग, भड़काऊ भाषण देकर मुश्किलों में फंसी भोपाल सांसद

भोपाल। देशभर के लोग बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ "हेट स्पीच" मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ अब उनके संसदीय क्षेत्र भोपाल के भी समाजसेवियों ने आवाज उठाई है। राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार एलएस हरदेनिया व अन्य समाजसेवियों ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि मालेगांव ब्लास्ट केस में प्रज्ञा ठाकुर की जमानत रद्द होना चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि, 'सांसद प्रज्ञा ठाकुर द्वारा कत्ल ए आम का खुला आह्वान किया जा रहा है और अल्पसंख्यकों एवं वर्ग विशेष को निशाना बनाने के लिए दुष्प्रेरित किया जा रहा है, जिससे समाज में भय का माहौल व्याप्त है। भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर का बयान IPC की धारा 153(A), 153(B), 268, 504, 505 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।'

यह भी पढ़ें: प्रज्ञा ठाकुर सांसद बने रहने के लायक नहीं, 100 से अधिक पूर्व ब्यूरोक्रेट्स ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र

ज्ञापन में आगे लिखा है कि, 'प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा पूर्व में भी देश की शांति व्यवस्था को भंग करने वाले बयान दिए जा चुके हैं। प्रज्ञा ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे (महात्मा गांधी का हत्यारा) के महिमामंडन के बयान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह भी निंदा कर चूके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि "मैं प्रज्ञा ठाकुर को कभी दिल से माफ नहीं कर पाऊंगा"।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि, 'प्रज्ञा ठाकुर वर्तमान में कुख्यात मालेगांव विस्फोट मामले (जोकि विशेष अदालत एनआईए के समक्ष लंबित है, में जमानत पर रिहा हैं) जिसमें वे मुख्य आरोपी व्यक्तियों में से एक हैं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा भड़काउ भाषण देना जमानत की शर्तों का भी खुला उल्लंघन है और जमानत को रद्द करने के लिए पर्याप्त है। ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी hate speech पर चिंता व्यक्त की है। अतः इस मामले में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।'

यह भी पढ़ें: घड़ियालों के लिए रिजर्व क्षेत्र में हो रहा अवैध खनन, शराबबंदी के बाद अब उमा भारती ने उठाया रेत खनन का मुद्दा

इसमें तर्क दिया गया है कि धर्मनिरपेक्षता को भारत के संविधान में सम्मिलित किया गया है और यह संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। प्रज्ञा ठाकुर का भाषण भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 की भावना के विपरीत है। आवेदकों में वरिष्ठ पत्रकार एलएस हरदेनिया के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र कोठरी, भारत ज्ञान विज्ञान सभा की आशा मिश्रा और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के शैलेंद्र शैली शामिल हैं। 

आवेदकगण के अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने कहा कि अगर पुलिस तत्काल उचित कार्रवाई कर सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं करती तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। बुंदेले ने यह भी कहा कि प्रज्ञा ठाकुर द्वारा अनर्गल बयानबाजी कर देश की शांति व्यवस्था को बिगाड़ने के आपराधिक कृत्य के खिलाफ़ मालेगांव ब्लास्ट केस में ज़मानत रद्द करवाने के लिए हम माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय में भी अपील करेंगे।

क्या है मामला

दरअसल, कर्नाटक के शिवमोगा में एक सम्मेलन के दौरान प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भीड़ को अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भड़काते हुए हथियार रखने की अपील की थी। प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान के बाद वह विपक्षी दलों के भी निशाने पर आ गईं थीं और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज हुई थी। देश के 100 से अधिक पूर्व ब्यूरोक्रेट्स भी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा दिए गए हेट स्पीच की आलोचना करते हुए कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। पूर्व नौकरशाहों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर कहा है कि प्रज्ञा ठाकुर सांसद सदस्य बने रहने के लायक नहीं है।