Bhopal: गणेशोत्सव पर प्रतिबंध से मूर्तिकारों की रोजी पर संकट

Corona Effect: कोरोना के कारण त्योहारों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक, छोटी मूर्तियों की भी माँग नहीं, मूर्तिकारों के सामने आर्थिक संकट

Updated: Aug-16, 2020, 06:49 PM IST

Bhopal: गणेशोत्सव पर प्रतिबंध से मूर्तिकारों की रोजी पर संकट

भोपाल। राजधानी में इस वर्ष आगामी गणेश चतुर्थी के अवसर पर किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन के इस निर्णय की वजह से शहर में मूर्तिकारों के सामने बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन न होने के कारण पंडाल में बड़ी मूर्तियां स्थापित नहीं हो पाएंगी। जिस वजह से मूर्तियां बना कर अपना जीवन यापन करने वाले एक वर्ग पर रोज़ी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। 

बागसेवनिया निवासी गणेश बताते हैं कि प्रशासन के आदेश के बाद से ही उनका काम अचानक ठप पड़ गया है। गणेशोत्सव के अवसर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन न होने की वजह से उनके और उनके साथियों द्वारा बनाई गई मूर्तियां अब बेकार हो गई हैं। गणेश ने बताया कि प्रशासन के निर्णय के बाद से उनका अब तक लगभग दो लाख रुपए से ज़्यादा का नुकसान हो गया है।

नहीं मिल रहे मूर्तियों के ऑर्डर 
गणेश इस समय राजधानी के कस्तूरबा नगर इलाके में गणेश जी की छोटी प्रतिमाएं निर्मित कर रहे हैं। इससे पहले वे बागसेवनिया स्थित गोडाउन में अपने साथियों के साथ मूर्तियां बनाते थे।गणेश ने अब तक 80 की संख्या में छोटी मूर्तियों का निर्माण किया है। लेकिन बिक्री के नाम पर उनके पास सिर्फ दो ऑर्डर हैं। इसके अलावा उनके पास सिर्फ एक टूटी मूर्ति की मरम्मत करने का काम बचा है। गणेश बताते हैं ' प्रशासन के निर्णय के बाद मैंने बड़ी मूर्तियों के बदले छोटी मूर्तियों का निर्माण करना शुरू किया। मुझे लगा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भले ही रोक लगा दी गई है, लेकिन लोग अपने घर में गणेश जी की पूजा करने के लिए छोटी मूर्तियां तो ज़रूर खरीदेंगे। लेकिन मेरे पास अब तक सिर्फ दो मूर्तियों के ऑर्डर आए हैं। जिस वजह से पहले ही कर्ज़ में डूबे होने के कारण और नुकसान झेलना पड़ रहा है।'

पिछले साल भी हुआ था नुकसान 
मूर्तिकार गणेश बताते हैं कि पिछले साल राजधानी में गणेश विसर्जन के दौरान बीस लोगों की डूब के मर जाने के बाद दुर्गा पूजा में मूर्तियों के बाज़ार में वो रौनक नहीं थी। गणेश ने बताया कि पिछली बार दुर्गा पूजा के अवसर पर पहले की तुलना में मूर्तियां नहीं बिकी। गणेश के कथनानुसार उनके पास पिछले वर्ष मां दुर्गा की 15 मूर्तियां बिना बिके ही रह गईं। गणेश ने बातचीत के दौरान कहा ' पिछली बार जब दुर्गा पूजा के समय मूर्तियां नहीं बिकीं तो डेढ़ लाख का नुकसान हो गया। मैंने सोचा कि अगले साल गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा में इस नुकसान की भरपाई हो जाएगी। लेकिन न तो अब गणेशोत्सव के दौरान मूर्तियां बिक सकती हैं और न ही दुर्गा पूजा के समय में। नुकसान और कर्ज़ में डूबने के बदले मेरे पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है।' 

कोरोना काल में कैसे कट रहा है जीवन?
गणेश राजधानी में पिछले 15 सालों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। बैतूल निवासी गणेश के माता पिता तीस साल पहले बंगाल से बैतूल आ गए थे। मूर्तिकारी के अपने खानदानी पेशे को प्रसारित करने के इरादे से गणेश 2005 में भोपाल आ गए। गणेश भोपाल में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहे हैं। 

गणेश ने बताया कि पिछले पंद्रह सालों में यह पहली बार है जब उन्हें इस तरह के दौर से गुजरना पड़ रहा है। गणेश बताते हैं कि कस्तूरबा नगर में मूर्तियां बनाने से पहले वे राजधानी के बागसेवनिया के एक गोडाउन में अपने बीस साथियों के साथ मूर्तियां निर्मित करते थे। कोरोना काल के दौरान एक तो काम वैसे ही ठप पड़ गया था लेकिन प्रशासन के सार्वजनिक गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के कार्यक्रमों पर रोक लगाने के बाद परिस्थिति और बिगड़ गई है। 

गणेश ने बताया कि जिस गोडाउन में वे अपने साथियों के साथ मूर्तियां बनाते थे, उसका अभी बीस हज़ार रुपए का किराया बकाया है। गणेश कहते हैं कि मूर्तियों की बिक्री न हो पाने की वजह से मैं जब अपना पेट नहीं पाल पा रहा हूं, तो किराया कैसे चुका पाऊंगा?' गणेश ने कहा कि ' एक तो गोडाउन का किराया बढ़ रहा है, दूसरी तरफ प्रशासन का निर्णय आते ही मेरे साथ काम करने वाले 20 लोग अपने अपने राज्यों की ओर लौट गए, जिसमें ज़्यादातर बंगाल से थे। कुछ लोग इसी शहर में हैं लेकिन उनका जीवन भी मेरे जैसा ही कट रहा है।हम सब दिहाड़ी कर के तो कभी सब्जी बेच कर जैसे तैसे कुछ जुटा कर, रोज़ी रोटी चला रहे हैं।' हालांकि गणेश अभी भी अपने एक अन्य साथी शिवकुमार के साथ मिलकर राजधानी के कस्तूरबा नागर में छोटी मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं, सिर्फ इस उम्मीद के साथ कि कम से कम छोटी मूर्तियों के ही ऑर्डर आ जाएं लेकिन उन मूर्तियों के लिए भी ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। गणेश की यह स्थिति शहर, प्रदेश और देश भर के मूर्तिकारों के उस दर्द को बयान कर रही है, जिसे मूर्तिकारों का यह वर्ग झेलने पर मजबूर है।

अब सार्वजनिक कार्यक्रमों के होने से भी स्थिति नहीं सुधरेगी
गणेश का कहना है कि अगर अब प्रशासन गणेश चतुर्थी के अवसर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति दे भी दे, तब भी वे इस आर्थिक तंगहाली से बाहर नहीं निकल सकते। गणेश कहते हैं ' पंडालों में स्थापित की जाने वालीं बड़ी मूर्तियों के निर्माण में तकरीबन दो से तीन महीनों का समय लग जाता है। इस समय गणेश चतुर्थी के आने में एक हफ्ते से भी कम का समय बचा है, जिसके कारण अगर अब प्रशासन गणेशोत्सव के सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति दे भी दे तब भी कोई फायदा नहीं हो पाएगा। अक्टूबर महीने में नवरात्रि हैं, अगर प्रशासन आज दुर्गा पूजा के सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति दे भी देता तब भी बड़ी मूर्तियां बनाना बड़ा कठिन होगा। हां, पिछले वर्ष की बची हुई मूर्तियों को बेच कर कुछ हद तक नुकसान की भरपाई हो सकती है।'