बुजुर्गों को कचरे की तरह गाड़ी में भरकर जंगल में छोड़ने का आरोप, इंदौर के वायरल वीडियो से इंसानियत शर्मसार

इंदौर में बुजुर्गों के साथ शर्मनाक बर्ताव का आरोप, ठंड में बुजुर्गों के साथ जानवरों से भी बुरा सुलूक, जीतू पटवारी बोले मां अहिल्या की नगरी को किया शर्मसार

Updated: Jan 29, 2021, 07:50 PM IST

बुजुर्गों को कचरे की तरह गाड़ी में भरकर जंगल में छोड़ने का आरोप, इंदौर के वायरल वीडियो से इंसानियत शर्मसार

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से अमानवीयता की सारी हदें पार करने वाली तस्वीरें सामने आई है। आरोप लग रहे हैं कि प्रदेश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर में बेसहारा बुजुर्गों के साथ जानवरों से भी बदतर सुलूक किया गया है। बेसहारा बुजुर्गों को कचरे की तरह गाड़ी में भरकर जंगलों की ओर छोड़ने ले जाया गया। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस तस्वीरों को लेकर शिवराज सरकार पर तीखा हमला किया है। पार्टी ने ट्विटर पर लिखा है, "आवारा पशुओं को जंगल में छोड़ते सुना था, —शिवराज ने बुज़ुर्गों को दूर फेंकने का दुष्कृत्य किया है। शिवराज जी, विधायक ख़रीदकर संवेदना नीलाम कर दी..? “शर्म करो शवराज”

 

 

निगम की इस बर्बर कार्रवाई को इंदौर के राउ से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने भी बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि आज मां अहिल्या की नगरी को शर्मसार कर दिया। इस मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस की सभी इकाइयों ने राज्य सरकार की तीखी आलोचना की है।

 

 

मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया, 'इंदौर निगम की शर्मनाक हरकत, भाजपा सरकार का घृणित कार्य। बेरहम इंदौर नगर निगम ने भारी ठंड में बुजुर्ग लोगो को जानवरों जैसे भरा निगम की गाड़ी में। लावारिस बुजुर्गों को शहर के बाहर छोड़ कर जा रहे थे निगम कर्मी, रहवासियों ने विरोध किया तब गाड़ी में वापस लेकर पता नहीं कहा छोड़ा है।'

 

 

बताया जा रहा है कि अगले महीने स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। इसलिए नगर निगम शहर की साफ सफाई में जुटा हुआ है। लेकिन शर्म की बात यह है कि कचरे को हटाकर जंगलों में फेंकते-फेंकते अब निगम इन बेसहारा बुजुर्गों को भी कचरे की तरह शहर से बाहर करने में जुट गया ताकि शहर स्वच्छ दिखे। 

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इस दौरान निगम कर्मचारी बेसहारा बुजुर्गों को गाड़ियों में भरकर शिप्रा गांव के आसपास के इलाकों में छोड़ने ले गए। लेकिन स्थानीय लोगों से यह देखा न गया। ग्रामीणों के विरोध करने पर निगम कर्मचारी वापस उन्हें जानवरों की तरह गाड़ियों में भरकर कहीं दूसरी जगह ले गए। फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि उन्हें कहां ले जाकर छोड़ा गया है।

विपक्ष ने इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से करते हुए इस घृणित कार्य का आदेश देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल इस घटना को लेकर नगर-निगम की ओर से या राज्य सरकार के अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।