मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों में पड़ी फूट, ग्वालियर और रीवा में हड़ताल खत्म होने के बाद भोपाल में भी हड़ताल खत्म

चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर जूडा पदाधिकारियों ने हड़ताल खत्म करने का किया ऐलान, कहा कोर्ट के आदेश का करते हैं सम्मान, चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा मानदेय में 17 प्रतिशत इंक्रीमेंट समेत सभी मांगें मान ली गई हैं

Updated: Jun 07, 2021, 03:52 PM IST

मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों में पड़ी फूट, ग्वालियर और रीवा में हड़ताल खत्म होने के बाद भोपाल में भी हड़ताल खत्म
Photo courtesy: twitter

भोपाल। हफ्तेभर की माथापच्ची के बाद आखिरकार मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई है। जूडा पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से मुलाकात के बाद हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया है। खबरों की मानें तो भोपाल से पहले ग्वालियर और रीवा मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर काम पर लौट गए थे। माना जा रहा है कि जूडा में पड़ी फूट की वजह से हड़ताल समाप्ति का ऐलान किया गया है।

वहीं जूनियर डॉक्टरों से मुलाकात के बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का बयान सामने आया है। जिसमें चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की सभी मांगें मान ली गई हैं। सरकार ने मानदेय में 17 प्रतिशत इंक्रीमेंट समेत सभी मांगें मान ली हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में एग्रीमेंट को लेकर कमेटी का गठन होगा जोकि दो महीने में अपना फैसला देगी।  मंत्री ने ट्वीट कर के इस बात की पुष्टि की है कि सभी जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए  हैं।

 

उन्होने कहा है कि सोमवार सुबह से ही ग्वालियर और रीवा में सुबह से काम शुरू हो गया है। मंत्री से मुलाकात के बाद भोपाल जूडा के अध्यक्ष डाक्टर हरीश पाठक ने कहा है कि सरकार ने मांगे पूरी करने का वादा किया है, हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए काम पर लौट रहे हैं।

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दरअसल कोरोना महामारी के दौर में जबलपुर हाईकोर्ट ने जूडा की हड़ताल को अवैध करार दिया था। वहीं इसी दौरान तीन हजार जूनियर डाक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था। भोपाल जूडा के अध्यक्ष डॉक्टर हरीश पाठक ने आरोप लगाया था कि उनकी हड़ताल खत्म करवाने के लिए उनके परिजनों को पुलिस द्वारा प्रताड़ित करवाया जा रहा है। वहीं कोर्ट ने डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था। कोरोना काल में जूडा की हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई थी। मरीजों के इलाज पर असर पड़ने लगा था।  अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी।