MP: गेहूं पर बोनस में 91 फीसदी की कटौती, CPIM ने मोहन सरकार पर लगाए किसानों के साथ विश्वासघात के आरोप
माकपा ने कहा कि भाजपा की मोहन यादव सरकार न केवल अपने चुनावी वादे से मुकर कर किसानों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि संकट से जूझ रही कृषि और किसानों के लिए नया संकट पैदा कर रही है।
भोपाल। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने गेहूं पर बोनस में 160 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती को भाजपा का किसान विरोधी कदम बताया है। माकपा ने कहा कि भाजपा की मोहन यादव सरकार न केवल अपने चुनावी वादे से मुकर कर किसानों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि संकट से जूझ रही कृषि और किसानों के लिए नया संकट पैदा कर रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि जब पेट्रोल, डीजल, खाद, बीज, बिजली और कृषि उपकरणों की कीमतों में वृद्धि से कृषि लागत बढ़ गई है, तब भाजपा की मोहन यादव सरकार ने विधानसभा चुनाव के पूर्व किए गए वादे के अनुसार किसान का गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की बजाय राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले बोनस में 160 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती कर अपना किसान विरोधी चेहरा बेनकाब कर दिया है।
माकपा नेता ने कहा है कि पिछले वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए था और राज्य सरकार की ओर से 175 रुपये बोनस दिया जाता था। इस प्रकार किसानों का गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इस बार केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए कर दिया है, लेकिन प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने बोनस को 175 रुपये से घटाकर सिर्फ 15 रुपये कर दिया है। जिससे किसानों को गेहूं का भाव 2600 रुपए ही मिलेगा।
जसविंदर सिंह ने कहा है कि पहली बार राज्य सरकार ने बोनस में कटौती की है और यह कटौती 91 प्रतिशत है। यदि सरकार बोनस बढ़ाने की बजाय पिछले साल के बराबर ही कर देती तो किसान के गेहूं का भाव 2760 रुपये क्विंटल हो जाता। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार के इस कदम को किसान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने और 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग की है।




